फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्लीनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट के विरोध में प्राइवेट अस्पतालों पर लटके ताले

विज्ञापन
विज्ञापन
प्राईवेट अस्पतालों की हड़ताल से परेशान हुए मरीज, इलाज के लिए भटके
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
क्लीनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट के विरोध में शुक्रवार को जिलेभर के प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम बंद रहे। सभी अस्पतालों के बाहर नोटिस आज अस्पताल बंद है का नोटिस चस्पा रहा। चिकित्सकों ने डॉ. अंबेडकर पार्क में एकत्रित होकर रोष जताया और शहर में प्रदर्शन किया। प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल का व्यापक असर रहा और सामान्य अस्पताल में डेढ़ गुणा ज्यादा भीड़ उमड़ी। प्राइवेट अस्पतालों में मरीज भटकते रहे और बंद का नोटिस देख वापस लौटते रहे।
शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा के आह्वान पर जिलेभर के प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम संचालकों ने हड़ताल की। प्रधान डॉ. धर्मपाल खरब के नेतृत्व में सभी डॉ. अंबेडकर पार्क में एकत्रित हुए। यहां रोष सभा कर सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताया। साथ ही इस काले कानून को प्राइवेट अस्पताल बंद करने का कानून बताया। यहां रोष सभा करने के बाद सभी जुलूस के रूप में प्रदर्शन करते हुए डीआरडीए कार्यालय में पहुंचे और एडीसी धीरेंद्र खड़गटा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चेतावनी दी कि इस पर रोक नहीं लगाई गई तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल करने पर मजबूर होंगे। इस मौके पर डॉ. सुशील मंगला, डॉ. सुरेश जैन, डॉ. सत्यवान शर्मा, डॉ. प्रमोद बंसल, डॉ. राजेंद्र सेठी, डॉ. गैरा, डॉ. सुरेश जैन, डॉ. कंवर सेन गोयल और डॉ. अनिल जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

10 गुणा महंगा होगा इलाज
हड़ताल कर रहे चिकित्सकों ने क्लीनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट को काला कानून करार देते हुए कहा कि इससे इलाज दो गुणा से 10 गुणा तक बढ़ जाएगा। सभी अस्पतालों को तोड़ नए सिरे से बनाना होगा। सभी स्टाफ सदस्य डिग्री धारक व ट्रेंड होने चाहिए। यह तो सरकारी अस्पताल के लिए भी संभव नहीं है। अस्पतालों की निगरानी व लगातार जांच के लिए एक टीम बनाई जाएगी। जिसके पास अस्पताल पर जुर्माना करने, बंद करने के अधिकार होंगे। ऐसे में भ्रष्टाचार बढ़ेगा। जिस ऑपरेशन के अब 20 हजार रुपये तक लगते है, इस एक्ट के तहत लाखों में ऑपरेशन होगा।
अस्पताल बंद कर दूसरे शहरों में चले जाएंगे
हड़ताल कर रहे चिकित्सकों का कहना है कि कोई भी अस्पताल एक्ट के नियमों पर खरा नहीं उतर पाएगा। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अस्पताल बंद करें, इससे बेहतर वह स्वयं ही अस्पताल बंद कर किसी बड़े शहर में चले जाएंगे। दूसरे राज्यों में भी चिकित्सकों के लिए ऑप्शन है।
अस्पताल पहुंचे 1500 से भी अधिक मरीज
प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल का सामान्य अस्पताल की व्यवस्थाओं पर खासा असर दिखा। आमतौर पर जहां एक हजार तक ओपीडी होती है, वहीं शुक्रवार को 15 सौ से भी अधिक ओपीडी रही। ज्यादातर ठंड, वायरल बुखार, खांसी-जुकाम, सांस की समस्या के मरीज रहे। प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल से मरीज खासे परेशान हुए और इलाज के लिए इधर उधर भटकते रहे।
विज्ञापन

--------
घायलों को पीजीआई ले गए परिजन
एसपी आवास के पास ट्रैक्टर ट्राली की टक्कर से सोन्याल गांव वासी मंजीत गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोग उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। गंभीर रूप से घायल युवक को इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। यहां से परिजन उसे पीजीआई ले जाने की बजाए किसी प्राइवेट अस्पताल या हिसार के किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की व्यवस्था करने लगे। बाद में अस्पताल स्टाफ सदस्यों ने उन्हें बताया कि आज प्रदेशभर में प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल है। इमरजेंसी केस भी नहीं देख रहे। जिसके बाद परिजन घायल को पीजीआई रोहतक लेकर गए। ऐसा इस अकेले केस में नहीं बल्कि इमरजेंसी में आए अधिकतर केसों में हुआ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें