शहर समेत कई गांवों में लगातार पेयजल संकट गहराता जा रहा है। इन सबसे बेफिक्र सर्विस स्टेशनों पर हजारों लीटर पानी गाड़ी धोने में व्यर्थ में बह रहा है। शहर में 40 से ज्यादा सर्विस स्टेशन चल रहे हैं, जो अपनी मर्जी के मालिक हैं। इन पर न तो प्रशासन का नियंत्रण है और न ही लाइसेंस बनाने का कोई प्रावधान ही, जिससे इन पर नकेल कसी जा सके।
शहर के तमाम सर्विस स्टेशनों पर भूमिगत जल का प्रयोग होता है। ऐसे में जन स्वास्थ्य विभाग भी ये कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है कि जब वे उनका पानी ही प्रयोग नहीं कर रहे हैं, तो उनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। वहीं नगर परिषद के अनुसार सर्विस स्टेशनों का लाइसेंस बनाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। प्रशासन के पास सर्विस स्टेशनों पर प्रतिदिन बह रहे हजारों लीटर पानी को बचाने के लिए कोई नियम-कायदे ही नहीं हैं।
नगर परिषद ने कार्रवाई के नाम पर 38 सर्विस स्टेशनों को गंदगी फैलाने व सड़कों पर पानी फेंकने के खिलाफ 20 दिन पहले नोटिस थमाए हैं। इस सबका सर्विस स्टेशनों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है और बेपरवाह पानी की बर्बादी में लगे हुए हैं। नगर परिषद के अनुसार सर्विस स्टेशन व्यवसायिक दायरे में नहीं आते हैं, तो इन्हें कोई सर्विस टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ता है। जहां पर सर्विस स्टेशन स्थापित हैं, उसी जगह का केवल व्यवसाय के लिए प्रयोग हो रही जमीन के नाम पर ही टैक्स लगाया जाता है।
प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा वाहनों की होती है वाशिंग
नगर परिषद के जानकारी में 42 सर्विस स्टेशन चल रहे हैं, वहीं कुछ सर्विस स्टेशन ऐसे हैं, जिनकी जानकारी नगर परिषद को नहीं है। शहर में सर्विस स्टेशनों पर प्रतिदिन 500 से ज्यादा बाइक और इतने ही बड़े वाहनों की वाशिंग होती है। एक बाइक की वाशिंग में औसतन 30 लीटर पानी का खर्च होता है, वहीं गाड़ी की वाशिंग में 80 लीटर पानी खर्च हो जाता है।
सभी सर्विस स्टेशनों पर भूमिगत जल का प्रयोग होता है। इससे प्रतिदिन करीब 55 हजार लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। जो कई गांवों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त है। वहीं सर्विस स्टेशन संचालकों के अनुसार गर्मियों को कम वाहनों की वाशिंग होती है। गर्मी के मौसम में अधिकतर लोग घर ही गाड़ियों की वाशिंग कर लेते हैं।
लगातार गिर रहा है जल स्तर
जिले में लगातार जल स्तर गिर रहा है। जींद खंड का साल 2010 में भू-जल स्तर 14.80 मीटर था, जो साल 2015 में बढ़कर 16.34 मीटर पर पहुंच गया है। वैसे जिले के काफी हिस्से में भूमिगत जल पीने लायक नहीं है। जहां भूमिगत जल पीने के लायक हैं, वहां लगातार जल स्तर गिरता जा रहा है।
पिछले कुछ सालों में भूमिगत जल स्तर के आंकड़े
जींद ब्लॉक में साल 2010 में 14.80, 2011 में 14.36, 2012 में 16.24, 2013 में 16.36, 2014 में 16.82 तथा 2015 में 16.34 मीटर भू-जल स्तर पहुंच चुका है। इसी तरह सफीदों, अलेवा, नरवाना, उचाना व सफीदों में भी लगातार जल स्तर गिर रहा है। फिलहाल इन सभी ब्लॉक में जल स्तर 12 मीटर से ज्यादा है। जुलाना ब्लॉक में भू-जल स्तर 4.96 मीटा व पिल्लूखेड़ा ब्लॉक का भू-जल स्तर 5.44 मीटर पर है, लेकिन दोनों ही ब्लॉक के ज्यादातर हिस्सों में भू-जल में लवणीय मात्रा ज्यादा होने की वजह से केवल पीने के ही नहीं, सिंचाई के भी लायक नहीं है।
सर्विस स्टेशन जन स्वास्थ्य विभाग का पानी नहीं करते प्रयोग
सर्विस स्टेशन जन स्वास्थ्य विभाग का पानी प्रयोग नहीं करते हैं। सर्विस स्टेशनों पर भूमिगत जल का प्रयोग होता है। ऐसे में जन स्वास्थ्य विभाग इन पर कार्रवाई नहीं कर सकता। यह नगर परिषद के अधीन आता है।
जगदेव मोर, एसडीई
जन स्वास्थ्य विभाग।
लाइसेंस बनाने का नहीं है कोई प्रावधान
सर्विस स्टेशनों के लिए लाइसेंस बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। जहां पर सर्विस स्टेशन स्थापित किए गए हैं, उस जगह का व्यवसायिक श्रेणी के तौर पर टैक्स नगर परिषद द्वारा वसूला जाता है।
सुभाष, लाइसेंस क्लर्क
नगर परिषद