मांगों के नहीं माने जाने से हसला में रोष
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हसला के राज्य उपप्रधान राजबीर रेढू ने स्कूल प्राध्यापकों की लंबित मांगों पर ध्यान नहीं देने से नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर अध्यापकों में रोष है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा नियमावली 2012 के तहत स्कूल प्राध्यापक के नाम के साथ छेड़छाड़ कर पीजीटी कर दिया गया। संगठन के विरोध के बाद पीजीटी से स्कूल लेक्चरर किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नियमावली 2012 के अनुसार प्राचार्य पद पर पदोन्नति का अनुपात 67 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत किया गया। प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए स्कूल प्राध्यापक तथा हाई स्कूल हेडमास्टर एक फीडिंग कैडर है। उन्होंने कहा कि जींद के स्कूल प्राध्यापकों की दो साल की एपीआर लंबित है। एमआईएस पूरा नहीं किया जा रहा। स्कूल प्राध्यापकों की दूसरी मांग वेतन विसंगतियों को दूर करना, न्यूनतम योग्यता रखने वाले स्कूल प्राध्यापकों को कॉलेज में पदोन्नत करना। पुरानी पेंशन बहाल करना। केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर आवासीय भत्ता जो चार साल से लंबित है को को दिया जाना है। इसके अलावा उनकी मांग में सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए पांचवीं तथा आठवीं की परीक्षा बोर्ड से संचालित करना। 9 से 12 के स्कूल को इंटर कॉलेज का नाम देना, उप प्राचार्य का पद स्वीकृत करना, सभी की पदोन्नति सूची जारी करना, कक्षा नौवीं से संकाय शुरू करना है। उन्होंने कहा कि इन सभी मांगों में से आज तक कोई भी मांग पूरी नहीं की गई है, जिसे अगर शीघ्र ही पूरा नहीं किया गया तो हसला कड़ा निर्णय लेगी।