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खाली प्लाटों में भरे बारिश के पानी से मंडरा रहा डेंगू व मलेरिया का खतरा

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प्लॉटों में भरे बारिश के पानी से मंडरा रहा डेंगू और मलेरिया का खतरा
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। तीन दिन पहले हुई बारिश के कारण हुए जलभराव की परेशानी झेलने के बाद अब प्लॉटों और पार्कों में भरा पानी लोगों के लिए बीमारी का भी खतरा बना हुआ है। प्लॉटों और पार्कों में भरा पानी डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारी फैलने का खतरा बना गया है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी की आशंका जताते हुए जन स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर पानी निकासी की मांग की है।
दरअसल लंबे इंतजार के बाद सोमवार को जींद में 85 एमएम बारिश हुई। इससे पूरे शहर में बाढ़ जैसे हालात बन गए। लोगों के विरोध के चलते कॉलोनियों से पानी निकाल दिया गया, लेकिन पार्कों व खाली प्लाटों में अब भी बारिश का पानी भरा हुआ है। अब स्वास्थ्य विभाग को डर सता रहा है कि कहीं इस पानी में मच्छर पनप कर बीमारी नहीं फैला दें। इसके लिए जन स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है, लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि खाली प्लाटों से पानी निकासी का काम नगर परिषद का है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जुलाई महीने से अक्तूबर तक मलेरिया व डेंगू फैलने का अंदेशा बना रहता है। ऐसे में बारिश का पानी रुकने से इसमें ओर भी तेजी आ सकती है। इससे बचाव के लिए ही स्वास्थ्य विभाग ने प्रक्रिया शुरू की है। वहीं शहरी क्षेत्र में मच्छरों से निजात दिलवाने की पूरी जिम्मेदार नगर परिषद पर रहेगी। इस बार फोगिंग का जिम्मा नगरपरिषद के पास है। बारिश के कारण शहर की सभी बाहरी कॉलोनियों के साथ कई पॉश कॉलोलिनयों में भी जलभराव की स्थिति रहती है। हैरानी की बात है कि हुडा जैसे रिहायसी क्षेत्रों में खाली प्लाट डेंगू और मलेरिया के घर बन रहे हैं। बारिश के दिनों में जैसे ही तापमान नीचे गिरेगा, वैसे ही डेंगू के मच्छर पनपना शुरू हो जाएंगे।
निकासी की समस्या बन रही है बाधा
दरअसल शहर में बारिश के पानी की निकासी का सही प्रबंध नहीं है। ऐसे में बारिश का अधिकतर पानी खाली प्लाटों में भर जाता है। यहां मच्छर रोकने के लिए सही इंतजाम नहीं होने के कारण मच्छरों की भरमार हो जाती है, जो मलेरिया और डेंगू का कारण बनते हैं।
पीएफ मलेरिया का केस भी मिला
इस बार मलेरिया का मौसम शुरू होते ही प्लाजमोडियम फाल्सीफार्म (पीएफ) मलेरिया का केस भी सामने आ चुका है। इस प्रकार का मलेरिया जानलेवा होता है। अब तक जिला में इसका एक ही केस सामने आया है, वहीं दूसरी तरह के मलेरिया प्लाजमोडियम वाइवैक्स (पीवी) होता है। इस प्रकार के मलेरिया के चार केस आ चुके हैं। वहीं पिछली साल मलेरिया के 135 व डेंगू के 27 के सामने आए थे। पिछले साल डेंगू से कुल तीन मौत जिला में हुई थी, लेकिन सरकारी रिकार्ड में इनकी सूचना नहीं है।
बुखार में नहीं बरतें लापरवाही
बारिश के मौसम में बुखार में लापरवाही नहीं बरतें। पैरासिटामोल जैसी दवा लेने से यदी बुखार नहीं जा रहा है तो तुंरत किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। बच्चों को हल्के बुखार में भी डॉक्टर को दिखाएं। अपने आसपास पानी के बर्तन ढक कर रखें और पूरी बाजू के पकड़े पहने। रात को मच्छरदानी का प्रयोग करें। पानी निकासी के लिए जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है। स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर जहां पानी रूका हुआ है, वहां अभियान शुरू किया जाएगा। लोगों मच्छर से बचने की सलाह दी जाती है।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
सीवरेज के पानी की निकासी का काम जनस्वास्थ्य विभाग को होता है। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग अपने पंप सैट से बारिश का पानी भी सीवर से निकाल रहा है। खाली प्लाटों में भरे पानी की निकासी की व्यवस्था नगर परिषद को करनी होती है।
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एसके शर्मा, एक्सईएन जनस्वास्थ्य विभाग।
खाली प्लाटों से पानी निकासी की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा बारिश के मौसम में शहर में फोगिंग भी करवाई जाएगी। यदि कहीं मच्छरों की समस्या अधिक है तो लोग बताएं, वहां प्राथमिकता के आधार पर फोगिंग करवा दी जाएगी।
पूनम सैनी, चेयरमैन, जींद नगर परिषद।
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