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नगर परिषद में निर्माण सामग्री के भ्रष्टाचार का मामला

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद। हमेशा अपनी कार्यशैली के लिए चर्चा में रहने वाली जींद नगर परिषद एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार मामला 17 लाख 60 हजार रुपये के गड़बड़झाले से शुरू हुआ, लेकिन अब इसकी प्राथमिक जांच में एक पुराना मामला भी सामने आ गया है। नगर परिषद चेयरपर्सन का दावा है कि 17 लाख 60 हजार के गड़बड़झाले की शिकायत करने वाले पूर्व पार्षद जितेंद्र सैनी ने नगर परिषद को मार्केट से महंगे रेट पर सामान बेच कर सरकार को करीब 29 लाख रुपये का चूना लगाया है। बहरहाल पूरे मामले की जांच चल रही है।
गौरतलब है कि जींद नगर परिषद द्वारा खरीदी गई सात लाख 60 हजार की निर्माण समाग्री के चेक सामान सप्लाई करने वाली फर्म के नाम नहीं बन कर नगर परिषद के एक कर्मचारी के नाम से बनाए गए थे। इस पर फर्म की मालिक के पति ने मामले को उठाया था। इसके बाद चेयरपर्सन पूनम सैनी ने अब तक सप्लाई हुए सामान की जांच शुरू की। पूनम का कहना है कि नगर परिषद में निर्माण सामग्री सप्लाई करने वाली तमाम फर्मों का पूरा ब्यौरा तलब किया है जिसमें पिछले 20 साल से निर्माण सामग्री सप्लाई करने वाली फर्मों, उनको की गई अदायगी, उस समय यहां तैनात रहे जेई, कार्यकारी अधिकारी, लेखाकार, आरएओ शामिल हैं। इसमें पाया गया कि सैनी रामलीला मैदान स्थित भारत सीमेंट डिस्ट्रीब्यूटर की मालिक सुनीता सैनी के पति जितेंद्र सैनी ने पार्षद रहते नियमों को ताक पर रखकर निर्माण सामग्री की सप्लाई की। पूनम ने कहा कि पूर्व पार्षद जितेंद्र ने भुगतान के जो आरोप लगाए थे, उसकी जांच चल रही है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जितेंद्र ने पार्षद रहते पद का दुरुपयोग किया है। पूर्व पार्षद ने पत्नी की फर्म के नाम से 2001 से 2005 तक बाजार से महंगे रेट पर नगर परिषद को सीमेंट सप्लाई की है। इस दौरान भी कैशियर के खाते के माध्यम से भुगतान हुआ है। चेयरपर्सन ने कहा कि जितेंद्र सैनी ने पार्षद रहते हुए पत्नी की फर्म से नगर परिषद को लगातार पांच साल तक विकास कार्यों के लिए सीमेंट सप्लाई की, जबकि यह सीधे-सीधे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट की धारा 21 की उप धारा सी और डी का उल्लंघन है। अब नगर परिषद इस मामले में उनके खिलाफ फौजदारी और दीवानी मुकदमा दायर करने पर विचार कर रही है।
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जांच में सामने आया है कि जितेंद्र सैनी ने पार्षद रहते हुए तीन जनवरी से 2001 से 13 जनवरी 2005 तक तक पत्नी सुनीता सैनी की भारत सीमेंट फर्म को नगर परिषद के सभी विकास कार्यों के लिए 20 लाख 29 हजार 844 लाख रुपये की सीमेंट सप्लाई की थी। अधिकारियों से मिलीभगत करके महंगे रेट पर यह सीमेंट सप्लाई की गई और नगर परिषद को नुकसान पहुंचाया।
केस दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू
प्राथमिक जांच में पूर्व पार्षद जितेंद्र सैनी दोषी मिले हैं। उन पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाने पर नगर परिषद विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि नप में भ्रष्टाचार को लेकर वह जीरो टोलरैंस की नीति पर चल रही हैं। जो भी गड़बड़ है, उसको जनता के सामने लाया जाएगा।
-पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, जींद।
अपने भ्रष्टाचार को ढकने का प्रयास
नगर परिषद में 17 लाख रुपये के भ्रष्टाचार का मामला है। इसकी शिकायत की गई है। इसमें चेयरपर्सन पूनम सैनी और कई अधिकारी सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं। इस मामले की जांच करवाने के बजाय पिछले मामलों को उठाकर अपने भ्रष्टाचार को ढकने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले में आखिर तक लड़ाई लड़ी जाएगी।
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-विनोद आसरी, पूर्व चेयरमैन, नगर परिषद, जींद।
मुझ पर दबाव बनाया जा रहा
यह मामला उठाने के बाद उन पर दबाव बनाया जा रहा है। एक जून को इसकी शिकायत सीएम विंडो पर की गई है। इसके बाद मुझे नगर परिषद के प्रभावशाली लोगों द्वारा धमकी भी दी जा रही हैं। जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी जांच करवा लें। निष्पक्ष जांच से दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। मुझसे 17 लाख रुपये भुगतान करने के बजाये मामला निपटाने के लिए और पैसे मांगे जा रहे हैं।
-जितेंद्र सैनी, पूर्व नगर पार्षद।
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