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स्वर्ग सिधार गए दशरथ

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श्री राम का नाम लेकर विलाप करते स्वर्ग सिधार गए दशरथ
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अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। भारतीय संस्कृति को समेटे श्री रामा भारतीय कला केंद्र के तत्वावधान में हुडा ग्राउंड में चल रही रामलीला के छठेें दिन रविवार को अयोध्या के लोगों का श्री राम के साथ चलना और राम द्वारा समझा कर उन्हें लौटाना, राम केवट संवाद और दशरथ का देहांत प्रसंग दिखाए गए। रामलीला का उद्घाटन गोशाला के प्रधान ओमप्रकाश मित्तल, समाजसेवी तेजवंत गोयल ठेकेदार, मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ देवेंद्र जांगड़ा व दिल्ली से आए लाला चतुर्भुज गर्ग ने रिबन काटकर व दीप प्रज्ज्वलित करके किया। श्रीराम लक्ष्मण व जानकी सहित वनगमन, गंगा पार करने के लिए केवट से नाव की मांग करते हैं तो केवट उनके पैर पखारने की जिद्द करता है। केवट का भक्ति भाव देखकर राम उसे आज्ञा देते हैं कृपासिंधु बोले मुसकाई, सोई करू जेहि तव नाव न जाई। बेगि आनु जल पाय पखारू, होत विलंब उतारहि पारू। उधर अयोध्या में श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप पाए दशरथ श्री राम के वनवास में चले जाने के बाद प्राण त्याग देता है। दशरथ की भूमिका में मेहरचंद पुजारी और केवट की भूमिका में नटवर ने दर्शकों को बांधे रखा। दिल्ली से आए चतुर्भुज पहले यहां राम की भूमिका किया करते थे। उन्होंने गीत सुनाकर अपने अनुभव सांझा किए। नरवाना की रामलीला की ख्याति सुनकर गुरूग्राम से कृष्ण लाल का परिवार नरवाना पहुंचा। इस अवसर पर प्रधान भारत भूषण, रोशनलाल मित्तल, अमृत उझाना, महावीर गर्ग, अचल मित्तल, रोहताश सिंगला, लक्ष्मण देव आर्य, हंसराज बंसल, रामनिवास जैन व राकेश शर्मा उपस्थित रहे।
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