फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल से अभी तक नहीं उभर पा रहा जींद डिपो

विज्ञापन
विज्ञापन
हड़ताल में नए ड्राइवरों ने खराब कीं बसें, पटरी पर नहीं लौट पाया रोडवेज
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जींद डिपो के वर्कशॉप के 234 पदों में से 133 पद खाली हैं। यही वजह है कि वर्कशॉप में बस की मरम्मत ढंग से नहीं हो पा रही है। जींद डिपो में 185 बसें हैं, जिसमें से कुल 172 ऑन रूट रहती हैं। तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण बस की मरम्मत अच्छी तरह से नहीं हो पाती। यही कारण है कि पिछले कई दिनों से लगातार खराब बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले छह दिन में 12 बसें खराब हो चुकी हैं। इससे लंबे रूट पर चलने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों की माने तो हड़ताल के दौरान लगाए गए चालकों ने बसों को अधिक खराब कर दिया है। इसके बाद से ही रोडवेज का बेड़ा पटरी पर नहीं लौट सका है।
जानकारी के लिए वर्कशॉप में कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल थे, जिससे बसों की मरम्मत ढंग से नहीं हो पाई। हड़ताल के दौरान ठेके पर लगाए गए चालकों द्वारा बसों की हालत ज्यादा खराब कर दी गई थी। तभी से खराब बसों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जीएस दूहन ने कहा कि हड़ताल के दौरान खराब हुई दो बसों के इंजन की ओवर हालिंग होनी है। बसों के पंप का काम होना है। इनको एजेंसी करनाल भेजा गया है। एक बस टूटी हुई है, जो गुरुग्राम वर्कशॉप गई है। इसके अलावा हड़ताल के दौरान दो बसों का एक्सीडेंट हो गया था। वह दो बसें अभी थाने में खड़ी हैं। ऐसे में बसों की मरम्मत अच्छी तरह से नहीं होने पर लंबे रूटों पर चलने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एचएसएससी ग्रुप डी की परीक्षा के दौरान भी गुरुग्राम, देहरादून व चंडीगढ़ के लिए गई बसों को खराब होने के कारण वापस लौटकर आना पड़ा था।
विज्ञापन

फिटनेस सर्टिफिकेट का बनाया नियम
वर्कशॉप में कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। जिस कारण बसों की मरम्मत अच्छी तरह से नहीं हो पाती। वर्कशॉप में अभी मैकेनिक, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर, पेंटर, वेल्डर, असिस्टेंट टायरमैन व अन्य के 133 पद खाली पड़े हैं। जिस कारण अब चालक व परिचालक को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वह फिटनेस सर्टिफिकेट के साथ ही बस को वर्कशॉप से निकाले। अगर वह नियम का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह नियम बसों की मरम्मत अच्छी तरह से करने के लिए उठाया गया है।
विज्ञापन

जीएस दूहन, वर्कशॉप मैनेजर
एक महीने में हुई पांच बस हुई कंडम
जीएस दूहन ने कहा कि पिछले एक महीने में पांच बस कंडम हो चुकी हैं। पिछले छह दिन में 12 बसें खराब हो चुकी हैं। वर्कशॉप में तकनीकी विशेषज्ञों की कमी के कारण बसों की मरम्मत में ज्यादा समय लगता है। जिस कारण बसों की मरम्मत अच्छी तरह से नहीं हो पाती है। अभी वर्कशॉप में 101 कर्मचारी काम कर रहे हैं व 133 पद खाली हैं। अगर 133 पदों पर सरकार द्वारा कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए तो बसों की मरम्मत अच्छी तरह से हो सकेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें