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इसी साल दिसंबर तक बनत्नकर तैयार होगा जींद का बाईपास, दस गांवों को मिलेगी अंडर पास की सुविधा, 100 करोड़ रुपये का बजट बढबए़ा

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केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने किया परियोजना का निरीक्षण
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
दिल्ली-पटियाला राष्ट्रीय राजमार्ग के फोर लेन व जींद के बाईपास पर चल रहे काम को जांचने के लिए केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने बुधवार सुबह एनएचएआई अधिकारियों के साथ परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि जींद बाईपास के करीब 15 किलोमीटर का काम इसी साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। वहीं अनूपगढ़ गांव से पंजाब सीमा तक करीब 70 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग को फोर लेन करने का काम 2019 तक पूरा कर लिया जाएगा।
बाईपास की इस परियोजना में अनूपगढ़ से पंजाब सीमा तक दस गांवों को अब अंडर पास की सुविधा भी मुहैया करवाई जाएगी। केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि इसको लेकर उन्होंने परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से लेकर अधिकारियों से तक से मुलाकात की है। 70 किलोमीटर लंबे फोर लेने के प्रोजेक्ट में दस अंडरपास बनने परियोजना की लागत करीब 100 करोड़ रुपये बढ़ जाएगी। इसका प्रावधान सरकार ने कर दिया है।
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20 साल से लटकी है परियोजना
इस दौरान केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जींद के बाईपास की परियोजना करीब 20 साल पहले बनी थी। इस पर सर्वे भी शुरू हुआ, लेकिन काम नहीं हो सका। ऐसे अब भाजपा सरकार बनने के बाद इस परियोजना को शुरू किया जा रहा है।

इन गांवों में मिलेगी अंडरपास की सुविधा
एनएचएआई के एक्सईएन आरके राठी ने बताया कि इस परियोजना में झांझ, खटकड़, बडौदा, डूमरखां कलां, डूमरखां खुर्द, उचाना, झील, बेलरखां, गढ़ी व उझाना सहित दस गांवों के लिए अंडरपास की सुविधा दी जाएगी। इससे लोगों को राष्ट्रीय राजमार्ग की व्यस्तता के चलते आने-जाने में आसानी होगी।

अहिरका के पास चौक की मांग होगी पूरी
अहिरका गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर चौक की मांग भी पूरी होगी। इसको लेकर जिला परिषद के उप प्रधान उमेद रेढू ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस पर उन्होंने ग्रामीणों की मांग पूरी करवाने का आश्वासन दिया।
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1100 करोड़ रुपये की परियोजना
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि फोर लेन परियोजना के निर्माण कार्य पर लगभग 11 सौ करोड़ रूपये की राशि खर्च की जा रही है। इसमें से लगभग 500 करोड़ रुपये की राशि बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए खर्च की गई है। इससे जींद ही नहीं, प्रदेश भर के लोगों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि बाईपास बनने से समय एवं ईंधन की बचत भी होगी। भारत अपनी खपत का 80 प्रतिशत तेल विदेशों से आयात करता है। अगर इस तरह के बाईपास निकाले जाते रहे तो तेल की बहुत बड़ी बचत होगी जिससे विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
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स्टील का करें अधिक प्रयोग
निरीक्षण के दौबरान इस्पात मंत्री ने एनएचएआई अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण में स्टील का अधिकाधिक प्रयोग करें। इसके लिए वे प्रोजेक्ट तैयार करें। उन्होंने आसाम में स्टील से बनाए गए ओवर ब्रिज का उदाहरण देते हुए कहा कि उस ब्रिज के निर्माण कार्य में 80 प्रतिशत स्टील का प्रयोग हुआ है। उन्होंने कहा कि सीमेेंट कंक्रीट से बनने वाली सड़कों की आयु लगभग एक सौ वर्ष होती है लेकिन स्टील से बनने वाले सड़कों एवं पुलों की आयु 150 वर्ष से भी अधिक होती है।
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उत्तर पश्चिमी भारत में लगेंगे स्क्रेप से स्टील बनाने के दो कारखाने
चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि लोहे तथा कोयले के प्राकृतिक भंडार लंबे समय तक चलते रहे, इसके लिए उत्तरी तथा पश्चिमी भारत क्षेत्र में स्क्रैप से स्टील बनाने के लिए दो बड़े कारखाने स्थापित किए जाएंगे। इन कारखानों को स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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