पटवारियों ने गिरदावरी में गन्ने के खेत में दिखाई धान की फसल, होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। एक माह पहले हुई बारिश की वजह से किसानों की धान और कपास की फसल को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है। इसे लेकर किसानों की मांग पर सरकार द्वारा द्रुत गति से गिरदावरी का काम चल रहा है। मगर गिरदावरी के दौरान पटवारियों द्वारा बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। वीरवार को जब डीसी अमित खत्री ने जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा किया तो उनको गिरदावरी में बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिली। पटवारियों ने अपने चहेते को फायदा पहुंचाने के लिए प्रभावित फसल ही बदल दी।
जब डीसी ने मौके पर सिजरा लेकर रिकार्ड जांचा तो पटवारियों द्वारा की गई गड़बड़ी की पोल खुल गई। ऐसे में डीसी ने मौके पर ही आदेश दिए कि जिन पटवारियों की शिकायतें मिलेंगी उनकी विजिलेंस जांच करवाई जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगा। इससे पटवारियों में हड़कंप मचा हुआ है। गिरदावरी में भ्रष्टाचार का संदेह भी पैदा हो रहा है। बहरहाल अब जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान डीसी ने वीरवार को संबंधित गांवों के पटवारियों को भी अपने साथ बुलाया। डीसी सबसे पहले खुद जलभराव वाले खेत का किला नंबर व मुरब्बा नंबर सिजरे से मिलान किया और इसके बाद गिरदावरी के रजिस्टर की जांच की। इस दौरान सामने आया कि कई जगह पटवारियों ने गलत गिरदावरी की है। निडाना गांव में सामने आया कि जिस खेत में गन्ने की फसल है, पटवारी ने गिरदावरी में उसमें धान की फसल दिखाई है। इसके अलावा कई अन्य गांवों में भी इस प्रकार की गड़बड़ियां पाई गई हैं। डीसी ने विशेष गिरदावरी पड़ताल का कार्यक्रम जुलाना क्षेत्र के करसोला गांव से शुरू किया। वे फतेहगढ़, लिजवाना खुर्द, ढिगाना, निडाना, लुदाना, सिवाना माल, भंभेवा गांव में गए।
डीसी ने निडाना गांव में गिरदावरी रजिस्टर के साथ खसरा से मिलान किया। कई ऐसे किला नंबर सामने आए जिनमें धान की फसल के बजाय कपास की फसल को दिखाया गया। किला नंबर का मिलान भी सही नहीं पाया गया। डीसी ने इस कार्य में कोताही बरतने वाले निडाना गांव के पटवारी सत्यनारायण, लुदाना के पटवारी रवि दत्त के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटवारियों द्वारा की गई गिरदावरी के कार्य में किसानों के साथ मिलीभगत होने का अंदेशा प्रतीत होता है। लुदाना में गिरदावरी रजिस्टर में पटवारी द्वारा धान की फसल में 60 फीसदी नुकसान दिखाया गया है, जिससे बाद में काटकर पटवारी द्वारा 10 फीसदी दिखाया गया। पटवारी की इस प्रकार की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में आ गई। डीसी ने कहा कि गिरदावरी के कार्य में इस प्रकार की कोताही बरतना अनुशासनहीनता को दर्शाता है। इस पर डीसी ने कहा कि तैयार किए गए गिरदावरी रिकार्ड के साथ छेड़छाड़ करना पटवारी की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस दौरान जिला राजस्व अधिकारी रामफल कटारिया, तहसीलदार प्रवीण कुमार, सफीदों क्षेत्र मेें सफीदों के एसडीएम मनदीप कुमार मौजूद रहे।
यूं मिली खामियां
डीसी ने सिजरा से गिरदावरी रजिस्टर का मिलान करते हुए लुदाना में पाया कि किला नंबर 17 से 24 तक 60 फीसदी से अधिक नुकसान दिखाया गया है, जबकि यहां वास्तव में नुकसान 10 फीसदी है। पटवारी रवि दत्त ने किला नंबर 49 में कपास की जगह धान की फसल दिखा रखी है। इसी प्रकार निडाना गांव के स्कूल की दीवार के पास से खड़े होकर किया गिरदावरी कार्य की पड़ताल की। यहां पटवारी द्वारा गन्ने की जगह कपास की फसल को गिरदावरी रजिस्टर में दर्ज किया है। खसरा नंबर मिलान के बाद पाया गया कि पटवारी सुनील दलाल द्वारा बाजरे की जगह धान की फसल दिखाई गई है।
निलंबित हो चुका है पटवारी
फसल में अधिक खराबा दिखाने के नाम पर किसान से रिश्वत की मांग करने वाला खरैंटी गांव का पटवारी सोनू पहले ही निलंबित हो चुका है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई किसान द्वारा दी गई ऑडियो रिकार्डिंग के आधार पर हुई थी।
कई गांवों के लोग लगा चुके हैं आरोप
इससे पहले भी कई गांवों के किसान पटवारियों पर गिरदावरी के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा चुके हैं। इस बारे में गांवों के लोगों द्वारा प्रशासन को भी ज्ञापन सौंपे गए थे। अब इस पर कार्रवाई शुरू हुई है।
जांच में कई प्रकार की खामियां सामने आई हैं। यह बहुत ही गंभीर विषय है। दो-तीन दिन में इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जांच विजिलेंस को सौंपी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। किसान भी इसमें अपनी शिकायत दे सकते हैं।
अमित खत्री, डीसी।