अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की हुई बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक सोमवार को जाट धर्मशाला में हुई। बैठक में कोरम पूरा नहीं होने के कारण जिला कार्यकारिणी का विस्तार नहीं हो सका। बैठक में 18 फरवरी को जींद में होने वाली बलिदान दिवस रैली के लिए चार जगहों को बैठक रखा गया, जिनमें से एक जगह को फाइनल किया जाएगा। रैली के लिए ब्लॉक स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर पहलवान ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला प्रधान कैप्टन भूपेंद्र जागलान ने कहा कि समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा 18 फरवरी जिला स्तरीय एक दिवसीय बलिदान दिवस रैली का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दो साल पहले जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 19, 20 और 21 फरवरी को कौम के जवान शहीद हुए थे, लेकिन समिति ने 18 फरवरी को ही बलिदान दिवस मनाने का फैसला लिया है। इसके लिए ईक्कस गांव और खटकड़ गांव जहां पहले धरना चला था, रोहतक रोड पर या सफीदों रोड पर जींद के नजदीक लगते किसी गांव में रैली की जाएगी। फिलहाल जगह फाइनल नहीं हुई है। 30 दिसंबर को फिर से बैठक होगी, जिसमें जगह पर फाइनल मोहर लगाई जाएगी। जागलान ने कहा कि आज की बैठक में जिला कार्यकारिणी के नए पदाधिकारियों का चयन किया जाना था लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण कार्यकारिणी का विस्तार नहीं किया जा सक। कैप्टन ने कहा कि 18 फरवरी की रैली के लिए गांव-गांव जाकर प्रचार किया जाएगा। जल्द ही ब्लॉक स्तर पर कार्यकारिणी का भी गठन किया जाएगा। जिस क्षेत्र में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति अपने आपको कमजोर महसूस कर रही है, उन क्षेत्रों में समिति को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इस मौके पर कैप्टन वेदप्रकाश बरसोला, सत्यवान ईक्कस, बिजेंद्र संधु, कर्ण सिंह दलाल, सत्यदेव सिंहमार, कर्ण सिंह दलाल और कैप्टन रणधीर सिंह चहल भी मौजूद रहे।
केवल छह युवक ही जेलों में
कैप्टन भूपेंद्र जागलान ने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान विभिन्न मामलों में लगभग 300 युवकों पर मामले दर्ज हुए थे। इन सभी युवकों की जमानत हो चुकी है और वे जेलों से बाहर आ चुके हैं। केवल 6 युवक अब भी जेलों में, जिनपर वित्तमंत्री की कोठी जलाने का आरोप है। जल्द ही यह युवक भी जेलों से बाहर आ जाएंगे। सरकार ने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जो समझौते के समय वायदे किए थे, उनमें से अधिकतर अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। इसलिए समिति को फिर से आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।