अमर उजाला ब्यूरो
जींद। स्थानीय जाट धर्मशाला को चलाने वाली जाट धर्मार्थ सभा में नए प्रधान का चुनाव सर्वसम्मति से होता दिखाई नहीं दे रहा है। अब तक जाट धर्मार्थ सभा के पांच प्रधान बन चुके हैं, जो सभी सर्वसम्मति से बने हैं। सर्वसम्मति बनाने के लिए 24 दिसंबर को एक बार फिर प्रयास किया जाएगा। यदि 24 दिसंबर को सर्वसम्मति नहीं बनती है तो प्रधानी के लिए पहली बार वोट डाले जाएंगे। जाट धर्मार्थ सभा के इस समय 3800 सदस्य हैं। सभा का सदस्य बनने के लिए 1100 रुपये की फीस ली जाती है।
जाट धर्मार्थ सभा का गठन 1997 में हुआ था। सभा के लिए हर तीन वर्षों में प्रधान का चुनाव किया जाता है। प्रीत सिंह जाट धर्मार्थ सभा के सबसे पहले प्रधान बने थे, जो 1997 से 2003 तक प्रधान रहे। 2003 में जिले सिंह को सर्वसम्मति से प्रधान मनोनीत किया गया। 2006 में राजपाल सिंह जाट धर्मार्थ सभा के तीसरे प्रधान चुने गए। इसके बाद 2009 में रामचंद्र चौथे प्रधान बने। रामचंद्र 2014 तक दो बार प्रधान रहे। 2015 को आजाद सिंह पवार को पांचवां प्रधान मनोनीत किया गया। अब तक पांचों चुनाव में वोटिंग की नौबत नहीं आई थी, सभी प्रधान सर्वसम्मति से चुने गए थे। मगर इस बार स्थिति कुछ अलग है। अभी तक जितने भी चुनाव हुए हैं, आम सभा की बैठक में तत्कालीन प्रधान ने अपना पद छोड़ते हुए नए प्रधान को कुर्सी सौंपने की परंपरा रही है। इस बार वर्तमान प्रधान आजाद सिंह पवार अगली टर्म में भी प्रधान पद पर बने रहना चाहते हैं या अपने चहेतों को प्रधान बनाना चाहते हैं, जिस कारण एक पक्ष नाराज हो गया । नतीजतन चार बैठकों के बाद भी किसी एक व्यक्ति पर सहमति नहीं बन पा रही है।
24 को फिर होगा प्रयास
जाट धर्मार्थ सभा की आम सभा की पहली बैठक 22 सितंबर को सर्वसम्मति से अगले प्रधान का चुनाव करवाने के लिए बुलाई गई थी लेकिन बात नहीं बनी। इसी प्रकार 12 नवंबर, 9 दिसंबर, 18 दिसंबर को आम सभा की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन बात नहीं बन रही। अब 24 दिसंबर को फिर से आमसभा की बैठक होगी। इसमें यदि किसी कारण सहमति नहीं बन पाई तो चुनाव होना निश्चित है।
छह से ज्यादा लोग प्रधान की दौड़ में
अब तक जाट धर्मार्थ सभा की आमसभा की चार बैठकों में आधा दर्जन से ज्यादा लोग प्रधान पद की दौड़ में आ चुके हैं। इनमें वर्तमान प्रधान आजाद सिंह पवार, कृष्ण खटकड़, आजाद लाठर, सतपाल मलिक, दिलबाग मलिक, फूल कुमार, भलेराम बूरा और जगत सिंह रेढू के नाम तो सामने आ चुके हैं, लेकिन कई नाम ऐसे हैं। यदि चुनाव हुआ तो वे भी सामने आ सकते हैं।
मैं नहीं प्रधान की दौड़ में
जाट धर्मार्थ सभा के प्रधान आजाद सिंह पवार ने कहा कि वह अगली बार के लिए प्रधान पद की दौड़ में नहीं हैं। वह चाहते हैं कि इस बार भी प्रधान का चुनाव सर्वसम्मति से हो लेकिन कुछ लोग आपसी गुटबाजी के कारण सहमति नहीं होने दे रहे।
पवार नहीं छोड़ना चाहते प्रधानी
प्रधान पद की दौड़ में शामिल कृष्ण खटकड़ ने कहा कि आजाद सिंह पवार प्रधान पद को नहीं छोड़ना चाहते। यदि वह आमसभा की बैठक में एक बार भी यह कह देते कि वे प्रधान पद छोड़ रहे हैं, अगली बार के लिए योग्य व्यक्ति को प्रधान बनाएंगे तो सहमति निश्चित रुप से हो सकती है। पवार चाहते हैं कि वह खुद प्रधान रहें, या अपने चहेतों को प्रधान पद पर सहमति से नियुक्त करवा दें।