प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर दुकानदारों को मिलेगा मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
दुकान में किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर अब सरकार नगर परिषद के माध्यम से मुआवजा देगी। मुआवजा 200 स्क्वायर फीट तक की दुकान के लिए ही मिलेगा। इसके अलावा रेहड़ी, फड़ी, खोखा दुकानदारों को भी मुआवजा मिलेगा। यह राहत राशि नुकसान के अनुसार ही मिलेगा। इसके लिए शहरी निकाय निदेशालय ने मुआवजा पॉलिसी में बदलाव किए हैं। इस बारे में शहरी निकाय निदेशालय के डायरेक्टर ने सभी नगर परिषद कार्यकारी अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।
अब तक छोटे दुकानदारों, खोखा दुकानदार, रेहड़ी दुकानदार या फड़ दुकानदार को आग लगने, बिजली गिरने और अन्य किसी प्राकृतिक आपदा से नुकसान होता था तो नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता था। कुछ केसों में ही डीसी की अनुमति से थोड़ा बहुत मुआवजा दिया जाता था। मगर अब सरकार ने छोटे दुकानदारों, रेहड़ी, फड़ और खोखा दुकानदारों के लिए पॉलिसी बनाकर राहत दी है। नई पॉलिसी में नुकसान के अनुसार ही मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजा राशि शुरूआत में नगर परिषद देगी मगर बाद में सरकार की ओर से यह मुआवजा राशि नगर परिषद को दी जाएगी। नुकसान के आंकलन और मुआवजे का निर्णय कमेटी लेगी। जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, नप अधिकारियों को शामिल किया गया है।
ऐसे होगी नुकसान की भरपाई
दुकान नुकसान मुआवजा
एक से दो लाख तक नुकसान 100 फीसदी
दो से तीन लाख तक नुकसान 75 फीसदी
तीन से पांच लाख तक नुकसान 50 फीसदी
पांच से सात लाख तक नुकसान 40 फीसदी
सात से 10 लाख तक नुकसान 30 फीसदी
10 लाख से अधिक नुकसान कोई मुआवजा नहीं
खोखा पर नुकसान
नुकसान मुआवजा
30 हजार तक 100 फीसदी
30 से 50 हजार तक 75 फीसदी
50 हजार से एक लाख तक 60 फीसदी
एक से डेढ़ लाख तक 50 फीसदी
रेहड़ी-फड़ी पर नुकसान
नुकसान मुआवजा
30 हजार तक 100 फीसदी
30 से 50 हजार तक 75 फीसदी
50 हजार से अधिक कोई मुआवजा नहीं
-मुआवजे के लिए देने होंगे ये दस्तावेज
-व्यावसायिक इमारत, किरायेदार के स्वामित्व का प्रमाण
-क्षतिग्रस्त संपत्ति की तस्वीरे
-एफआईआर की कॉपी
-स्वयं घोषणा पत्र की उसने किसी अन्य सरकारी, सार्वजनिक एजेंसी से नुकसान का क्लेम नहीं किया है
-समर्थन दस्तावेज के साथ क्लेम बिल
पूरी करनी होंगी शर्तें
क्लेम के लिए आवेदन करने वाले दुकानदार के लिए स्कीम की कुछ शर्तें भी हैं। जिसमें मुख्य रूप से उसके पास ट्रेड लाइसेंस हों। वैट नंबर हो। उसने किसी अन्य एजेंसी से नुकसान के लिए आवेदन न किया हो। साथ ही उस पर किसी प्रकार का टैक्स बकाया न हो।
अब तक डीसी से बैठक कर ही विशेष केसों में दुकानदारों को नुकसान होने पर मुआवजा दिलाते है। ऐसी पॉलिसी बनती है तो बेहतर है। अभी इस बारे में पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने पर इस पालिसी को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा।
सुरेश कुमार, कार्यकारी अधिकारी