बाईपास निर्माण के काम को फिर झटका, चार गांवों के किसानों ने कम मुआवजा मिलने पर रुकवाया काम
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। 25 साल पहले घोषणा होने के बाद जींद के बाईपास का काम शुरू होते ही फिर इस परियोजना को झटका लगा है। दरअसल चार गांवों के किसानों ने कम मुआवजा मिलने का आरोप लगाते हुए बिशनपुरा गांव के पास बाईपास पर ही धरना शुरू कर दिया है। इसी बीच वीरवार को एनएचएआई के एसई आरके राठी ने बाईपास निर्माण का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन के साथ मिलकर किसानों की बात सुनने की भी योजना बनाई, लेकिन किसानों के साथ मुलाकात नहीं हो सकी। अब प्रशासन अपने स्तर पर किसानों को मनाने का प्रयास कर रहा है।
इस परियोजना में किसानों के विरोध को देखते हुए अब अधिकारियों को तय समय में परियोजना पूरी करने में दिक्कत आती दिख रही है। हालांकि फिलहाल किसानों के विरोध के चलते काम रुकने की स्थिति नहीं है, लेकिन किसानों ने बाईपास के बीचोंबीच धरना लगाकर अपना विरोध जताना शुरू कर दिया है। वीरवार को किसानों ने अर्धनग्न अवस्था में होकर धरना दिया और प्रशासन व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दूसरी ओर एनएचआई के परियोजना निदेशक आरके राठी ने वीरवार को परियोजना पर चल रहे काम का निरीक्षण किया और अधिकारियों को तय समय में काम पूरा करने के आदेश दिए। इस दौरान उनके साथ डीसी अमित खत्री ने भी परियोजना की जानकारी ली। गौरतलब है कि रोहतक से पंजाब सीमा तक बनने वाले फोर लेन मार्ग को हिसार व रोहतक एनएचआई बना रहे हैं। फिलहाल किनाना गांव से पंजाब सीमा तक हिसार एनएचआई के अधीन काम शुरू हुआ है। कुल 71 किलोमीटर से अधिक लंबाई की परियोजना में 15 किलोमीटर जींद के बाईपास का काम है। इस पूरी परियोजना पर 552 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। जींद के आसपास बनने वाला बाइपास सीमेंट कंक्रीट का होगा। 71 किलोमीटर की इस परियोजना में दो रेलवे ओवरब्रिज होंगे और पांच फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे। हलके वाहनों के लिए एक अंडर पास अनूपगढ़ गांव के पास बनेगा। राजवाहों, नहरों और पानी की नालियों पर कुल 144 पुलिया बनाई जाएंगी।
किसान मांग रहे हैं अधिक मुआवजा
बिशनपुरा गांव के पास धरना दे रहे बिरोली, अनूपगढ़, बिशनपुरा के किसानों का कहना है कि उन्हें असरफगढ़ और पिंडारा के किसानों के मुकाबले काफी कम मुआवजा मिला है। जहां बिरौली गांव के किसानों को महज 12 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मिला है, वहीं असरफगढ़ के किसानों को 22 लाख रुपये प्रति एकड़ और पिंडारा में किसानों को 80 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया गया है। यह किसान भी पिंडारा गांव के किसानों के बराबर ही मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
एक साल में बाईपास दो साल में पूरी परियोजना तैयार
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरके ने अमर उजाला को बताया कि किनाना गांव से पंजाब बार्डर तक नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य जुलाई 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि यह काम तय समय से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा। वहीं उन्होंने कहा कि जींद के बाईपास का काम एक साल में पूरा कर लिया जाएगा।
अधिकारियों ने जांची गुणवत्ता
निरीक्षण के दौरान डीसी अमित खत्री व प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरके राठी ने बाईपास बनाने वाली कंपनी के प्लांट का भी निरीक्षण किया। यहां इस परियोजना में प्रयोग की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता की भी जांच की गई। आरके राठी ने बताया कि काम सही चल रहा है।
किसानों के विरोध के चलते अभी तक कहीं भी काम नहीं रूका है। यदि किसानों की मुआवजे को लेकर कोई परेशानी है तो उसकी प्रक्रिया है, उनका हक उन्हें जरूर मिलेगा। किसी भी काम को रोकना कोई समाधान नहीं है। वीरवार को किसानों से बातचीत नहीं हो सकी, इसका रास्ता निकाल लिया जाएगा।
विरेंद्र सहरावत, एसडीएम, जींद।