जींद। कोरोना महामारी की पहली तथा दूसरी लहर से सबक लेने के बाद अब जिला स्वास्थ्य विभाग संभावित तीसरी लहर से निपटने को पूरी तरह से तैयार है। पहली लहर में स्वास्थ्य विभाग को छह वेंटिलेटर मिले थे, जो चल नहीं पाए थे। दूसरी लहर में यह वेंटिलेटर चल पाए।
अब 15 अन्य वेंटिलेटर और मिल गए। अब संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग के पास 21 वेंटिलेटर हैं, जो पूरी तरह से तैयार कर दिए गए हैं और बेडों पर लगा दिए हैं। इसके अलावा 77 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर भी अस्पताल के पास मौजूद हैं। वहीं अब ऑक्सीजन की किल्लत से बचने के लिए अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट भी लग रहा है, जो एक सप्ताह में शुरू हो जाएगा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन तीसरी लहर से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत पिछले वर्ष अप्रैल महीने में हो गई थी। अप्रैल महीने में संक्रमण के दो मामले सामने आए थे। यह दोनों ही ठीक हो गए थे। इसके बाद कभी दो, कभी पांच इसी प्रकार मामले सामने आते रहे। अगस्त के अंतिम सप्ताह के बाद और जनवरी तक जिले में कोरोना संक्रमण के पांच हजार मामले सामने आए थे और 90 लोगों की मौत हुई थी। सितंबर व अक्तूबर महीने में सबसे अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसे पहली लहर का नाम दिया गया था। इसी प्रकार इस वर्ष अप्रैल व मई महीने में सबसे ज्यादा संक्रमित हुए और सबसे अधिक मौतें हुई। इस वर्ष 16 हजार संक्रमण के मामले आ चुके हैं और 446 लोगों की मौत हुई। अप्रैल व मई महीने को दूसरी लहर में गिना जाता है। अब तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है। पहली व दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग के पास इतने अधिक पर्याप्त साधन नहीं थे। अब स्वास्थ्य विभाग के पास 21 वेंटिलेटर, 77 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, बाईपेप, सीपेप, ऑक्सीजन प्लांट समेत काफी संसाधन हो गए हैं। संवाद
वर्जन-
पहली लहर में स्वास्थ्य विभाग के पास कोई खास संसाधन नहीं थे। दूसरी लहर में काफी संसाधन जुटे। अब सभी उपकरणों को शुरू करवा दिया गया है तथा बेडों पर लगा दिया है। फिलहाल 21 वेंटिलेटर काम कर रहे हैं। 77 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर भी काफी मददगार साबित होंगे। इसके अलावा 140 बड़े तथा 120 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर भी भरवाकर तैयार रखे हुए हैं। यदि लोगों ने नियमों का पालन किया तो तीसरी लहर को जिला में रोका जा सकता है।
- डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।