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2400 में से केवल 89 किसानों ने किया सोलर ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए अप्लाई

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जींद। बिजली निगम द्वारा किसानों से सोलर ट्यूबवेल कनेक्शन लगवाने के लिए आवेदन मांगा गया था। महज 89 किसानों ने ही सोलर ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। कुल 2400 किसानों ने ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। इनमें से 89 ने ही सोलर ट्यूबवेल के लिए आवेदन किया है। बाकी के 2311 ने पारंपरिक बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। किसानों को 31 मार्च तक इसके लिए आवेदन मांगा गया था।
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75 प्रतिशत अनुदान भी नहीं लुभा पाया किसानों को
निगम द्वारा सोलर ट्यूबवेल लगवाने पर किसान को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा था। सोलर ट्यूबवेल कनेक्शन लेने पर किसान दिन के समय में खेतों की सिंचाई कर सकेगा और उसे रात को जागने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा सोलर ट्यूबवेल लगवाने पर बिजली बिल भरने से छुटकारा मिल जाता है। पहले पांच साल तक सोलर सिस्टम के रख-रखाव पर किसान को एक पैसा भी खर्च नहीं करना होगा। उसे सोलर कनेक्शन में सोलर पैनल, मोटर पंप, कंट्रोल पैनल तथा बोर पाइप आदि निगम द्वारा दिए जाने थे। निगम द्वारा किसानों को बड़ा अनुदान दिए जाने के बाद बावजूद भी किसानों ने सोलर ट्यूबवेल में कोई रुचि नहीं दिखाई।
बिजली कनेक्शन महंगा, फिर भी किसानों को सप्लाई पर ही भरोसा
सोलर ट्यूबवेल के बजाय निगम का पारंपरिक ट्यूबवेल कनेक्शन बेहद महंगा है, लेकिन इसके बावजूद किसानों ने पारंपरिक ट्यूबवेल कनेक्शन पर ज्यादा भरोसा जताया है। निगम ने किसानों को भेजे पत्र में साफ लिखा है कि यदि किसान बिजली का परंपरागत कनेक्शन लेता है तो उसे बिजली कनेक्शन के लिए अनुमानित खर्च डेढ़ से दो लाख 25 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ेगा। अन्य उपकरण जैसे मोटर पंप, कंट्रोल पैनल और बोर पाइप आदि का खर्च अलग से देना होगा। फाइव स्टार एनर्जी एफेशियेंट मोटर और स्मार्ट कंट्रोल पैनल लगवाना भी अनिवार्य है। इस प्रकार उपभोक्ता द्वारा वहन की जाने वाली कुल राशि चार से पांच लाख रुपये बनती है। बिजली का बिल भी किसान को खुद भरना पड़ता है। बिजली के आने-जाने का कोई समय नहीं है। रात को कई बार बिजली की सप्लाई आती है। इन सब बातों के बावजूद भी किसानों ने सोलर कनेक्शन लेने में रुचि नहीं दिखाई।
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तीन एचपी पर किसान को देने थे मात्र 58750 रुपये
निगम द्वारा सोलर कनेक्शन लेने पर अनुदान बेहद ही सस्ता पड़ता है। यदि कोई किसान तीन एचपी का कनेक्शन लेता है तो इसकी अनुमानित लागत दो लाख 35 हजार रुपये है। सरकार द्वारा एक लाख 76 हजार 250 रुपये अनुदान दिया गया था। किसान को मात्र 58 हजार 750 रुपये की राशि ही जमा करवानी थी। इसी प्रकार से पांच एचपी कनेक्शन पर तीन लाख 33 हजार रुपये की अनुमानित लागत है। सरकार की ओर से दो लाख 49 हजार 750 रुपये की राशि अनुदान के रूप में दी दानी थी, जबकि किसान को मात्र 83 हजार 250 रुपये की राशि देनी पड़ती। 7.50 एचपी कनेक्शन के लिए चार लाख 78 हजार रुपये अनुमानित लागत है। सरकार द्वारा तीन लाख 58 हजार 500 रुपये की राशि अनुदान के रूप में दी जानी थी, जबकि किसान को मात्र एक लाख 19 हजार 500 रुपये देने थे। 10 एचपी ट्यूबवेल कनेक्शन की अनुमानित लागत छह लाख दस हजार रुपये है। सरकार द्वारा चार लाख 57 हजार 500 रुपये अनुदान के तौर पर जानी थी, जबकि किसान को एक लाख 52 हजार 500 रुपये भरने थे। इसके बाद भी किसानों ने सोलर कनेक्शन लेने में रुचि नहीं दिखाई।
क्या कहते हैं बिजली निगम के एसई
बिजली निगम के एसई श्यामबीर सैनी ने कहा कि किसानों के लिए सोलर कनेक्शन लगवाने के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसमें किसानों ने रुचि नहीं दिखाई। 2400 किसानों में से 89 ने ही सोलर कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। वहीं 2311 किसानों ने परंपरागत कनेक्शन के लिए ही आवेदन किया है। सोलर कनेक्शन के किसानों को काफी फायदा होगा।
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