पहली बार जींद के रण में कूदे दो बाहरी, जनता ने दोनों को नकारा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जहां एक ओर उपचुनाव में कई मिथक टूटे हैं, वहीं पहली बार जींद के रण में उतरे बाहरी उम्मीदवारों को जींद की जनता ने नकार दिया है। हालांकि जींद में अब तक बाहर से आकर किसी बड़े नेता ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उपचुनाव में पहली बार दो दिग्गज चुनाव मैदान में उतरे और दोनों को जींद के लोगों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। जींद में अब तक 13 विधायक बने हैं। इनमें से कोई भी बाहरी नहीं बना। सबसे पहले 1967 व 1968 में कांग्रेस के दयाकृष्ण, 1972 में चौधरी दल सिंह, 1977 में मांगेराम गुप्ता, 1982 में बृजमोहन सिंगला, 1987 में परमानंद, 1991 में मांगेराम गुप्ता 1996 में बृजमोहन सिंगला, 2000 व 2005 में मांगेराम गुप्ता और इसके बाद 2009 व 2014 में हुए चुनाव में डॉ. हरिचंद मिड्ढा विधायक बने। हालांकि पिछले 40 साल तक जींद की राजनीति मांगेराम गुप्ता व बृजमोहन सिंगला के चारों ओर घूमती रही, लेकिन कोई भी बाहरी उम्मीदवार जींद में चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सका। इस चुनाव में पहली बार कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला और जजपा के दिग्विजय चौटाला बाहरी उम्मीदवार आए और दोनों को हार का सामना करना पड़ा है।
पांचवीं बार इतने बड़े अंतर से हुई हार-जीत
जींद विधानसभा के इतिहास में उपचुनाव में पांचवीं बार ऐसा हुआ है कि हार-जीत का अंतर दस हजार मतों से अधिक रहा है। इससे पहले 1967 में कांग्रेस के दयाकृष्ण 10541 मतों से आजाद उम्मीदवार इंद्र सिंह को हराकर विधायक बने थे। 1968 में हुए दूसरे चुनाव में हालांकि दयाकृष्ण फिर से विधायक बने, लेकिन वे महज 1597 मतों से ही आजाद उम्मीदवार शंकरदास को हरा सके। 1972 में कांग्रेस के दल सिंह ने कांग्रेस के दयाकृष्ण का 6282 मतों से हराया। 1977 में आजाद उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता ने जनता पार्टी के प्रताप सिंह को 6105 मतों से हराया। 1982 में लोकदल के बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को महज 146 मतों से हराया। 1987 में लोकदल के परमानंद ने 8102 मतों से कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया था। 1991 में दूसरी बार हार जीत का अंतर दस हजार वोट से अधिक का हुआ और कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने जनता पार्टी के टेकराम को 16133 मतों से हरा दिया। 1996 में हरियाणा विकास पार्टी के बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 18558 मतों से हराया था। वर्ष 2000 के चुनाव में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के गुलशन लाल को 4643 मतों से हराया। 2005 में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के सुरेंद्र बरवाला को 17435 मतों से हराया। 2009 के चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 7862 मतों से हराया। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को 31631 व बरवाला को 2257 मतों से हराया। अब हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने जेजेपी के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला को 12930 मतों से हराया।