कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़ा कर गया उपचुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। उपचुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार का कारण कहीं न कहीं कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर गया है। उपचुनाव में जितने भी उम्मीदवार थे उनमें रणदीप सिंह सुरजेवाला का सबसे बड़ा था। इसके बावजूद उनका तीसरे नंबर पर आना यह साबित करता है कि विधायक होने के बावजूद दोबारा चुनाव लड़ने के कारण लोगों ने उन्हें नकार दिया। सभी कांग्रेसी नेताओं के एक मंच पर आने के कारण भी कांग्रेस कार्यकर्ता ज्यादा उत्साह में आ गए थे । वे अपनी जीत पक्की मानकर चल रहे थे। यह भी हार का बड़ा कारण माना जा रहा है।
जिस समय रणदीप सिंह सुरजेवाला का नाम कांग्रेस ने जींद उपचुनाव में घोषित किया तो सभी तरफ एक ही बात हो रही थी कि इतने बड़े चेहरे को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारकर यह उपचुनाव जीतना सुनिश्चित कर लिया है। उसके बाद उनके नामांकन के समय सभी कांग्रेसी नेताओं का एक साथ आने से भी यह तय हो गया था कि अब कांग्रेस इस रण को जीत लेगी। सुरजेवाला का बाकी नेताओं के मुकाबले राजनीतिक प्रोफाइल बड़ा है। इस कारण भी कांग्रेस कार्यकर्ता ज्यादा उत्साहित थे। अब चुनाव में हुई करारी हार के कारण यह बात साबित हो गई है कि कांग्रेस नेता केवल चेहरा दिखाने के लिए सुरजेवाला के साथ खड़े थे। 2014 के चुनाव में कांग्रेस के प्रमोद सहवाग को 15267 वोट मिले थे। हालांकि प्रमोद सहवाग के राजनीतिक प्रोफाइल के हिसाब से रणदीप सिंह सुरजेवाला का प्रोफाइल बहुत बड़ा है। इसके बावजूद रणदीप सिंह सुरजेवाला इस चुनाव में केवल 22742 वोट ही हासिल कर पाए। सुरजेवाला के चुनाव में सभी दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के जोर लगाने के बावजूद पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस चुनाव में 7475 वोट ही ज्यादा हासिल हुए। इससे साफ है कि जींद के लोगों ने रणदीप सिंह सुरजेवाला को सिरे से नकार दिया। उपचुनाव की 13 राउंडों में गिनती हुई। एक भी राउंड में रणदीप सिंह सुरजेवाला कहीं आगे नहीं निकले। उससे कहीं आगे भाजपा रही तो कहीं जननायक जनता पार्टी रही।