उपचुनाव : भितरघात और कमजोर जमीन को तैयार कर सकेंगे राजनीतिक दल
धर्मवीर निडाना
जींद। सत्ता का सेमीफाइनल माना जाने वाला जींद विधानसभा उपचुनाव राजनीतिक दलों के लिए जीत-हार से ज्यादा 2019 में होने वाले लोकसभा और हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले खुद को तैयार करने का अंतिम मौका होगा। वहीं कुछ दलों को पार्टी की कमजोर स्थिति और भितरघात के खिलाफ तैयारी का भी अच्छा मौका मिल जाएगा।
इसी साल लोकसभा का चुनाव होना है। ऐसे में जींद उपचुनाव के परिणाम को लोग प्रदेश की जनता के मूड के रूप में देख रहे हैं। हालांकि उपचुनाव में किसी एक राजनीतिक दल की ही जीत होगी, लेकिन फरवरी और मार्च महीने में राजनीतिक दलों द्वारा जींद विधानसभा में चुनाव में हुई हार और जीत के अंतर के हिसाब से सभी राजनीतिक दलों को तैयारी करनी होगी। वहीं इसके बाद प्रदेश विधानसभा का चुनाव होना है। जींद उपचुनाव के आधार पर राजनीतिक दल इसके लिए भी तैयारी करेंगे।
भाजपा और कांग्रेस का सता रहा भितरघात का डर
उपचुनाव के लिए मतदान हो चुका है, लेकिन कांग्रेस व भाजपा को भितरघात का डर सता रहा है। दरअसल दोनों ही पार्टियों में टिकट मांगने वालों की लाइन लंबी थी। टिकट कटने के बाद दोनों पार्टियों के कुछ नेता नाराज चल रहे थे। हालांकि बड़े नेताओं ने सभी को मना कर चुनाव में साथ जोड़ा, लेकिन इन लोगों ने पार्टी उम्मीदवार की कितनी मदद की, यह चुनाव परिणाम से ही साफ होगा।