अमर उजाला ब्यूरो
जींद। बिजली निगम अक्सर किसानों को ट्यूबवेल के नये कनेक्शन देने और ट्रांसफार्मर जलने पर चक्कर कटवाने में माहिर है। प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार किसानों को तत्काल बिजली कनेक्शन की कार्रवाई को तीन महीने की अंदर पूरा करना होता है। इस दौरान किसान से तत्काल की फीस एक लाख रुपये, पोल और ट्रांसफार्मर का खर्च जमा करवाकर बिजली कनेक्शन देने का प्रावधान है। निगम अधिकारी इतने लापरवाह बने हुए हैं कि किसानों को तत्काल नियमों के तहत भी कनेक्शन समय पर नहीं दे रहे।
नरवाना खंड के बडनपुर निवासी बलराज श्योराण ने बिजली निगम मेें 22 दिसंबर 2017 को एक लाख रुपये तत्काल ट्यूबवेल कनेक्शन लेने के लिए जमा करवाए थे, लेकिन आठ माह के बाद भी बलराज को कनेक्शन नहीं मिला। बलराज ने इस दौरान निगम के एसडीओ से लेकर एसई और सीएम विंडो तक शिकायत दी, लेकिन बलराज की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बलराज में आरोप लगाया कि निगम का जेई और ठेकेदार उनके कनेक्शन को अटकाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि धान की फसल का समय निकलता जा रहा है। अगर अब कनेक्शन नहीं मिला तो उनके परिवार पर भूखे मरने की नौबत आ सकती है। इसकी जिम्मेदारी बिजली निगम की होगी।
तत्काल बिजली कनेक्शन के लिए फीस जमा करवाने के बाद टेंडर प्रकिया होती है। इसके बाद ठेकेदार का कार्य होता है। किस कारण से कनेक्शन अब तक नहीं दिया गया। इसका जवाब ठेकेदार से लिया जाएगा और शीघ्र बिजली कनेक्शन देनेे के लिए कार्रवाई की जाएगी।
-शंकरलाल, एसडीओ, बिजली निगम, नरवाना।