बीएड की परीक्षा सोमवार से शुरू हो रही है, लेकिन कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण करीब 200 विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
कारण कॉलेज द्वारा विद्यार्थियों की पूरी फीस नहीं भरना बताया जा रहा है। इनमें एक कॉलेज जींद के गतौली गांव में स्थित है और दूसरा करनाल जिले का है।
राजकीय पीजी कॉलेज में बने दो परीक्षा केंद्रों में प्रदेश के पांच बीएड कॉलेजों के विद्यार्थियों को परीक्षा देनी है। सूत्रों के अनुसार इनमें से दो कॉलेजों के प्रबंधन ने राजकीय पीजी कॉलेज को दी जाने वाली चार हजार रुपये प्रति विद्यार्थी की फीस का भुगतान नहीं किया है। इनमें एक कॉलेज ने तो पिछले साल भी परीक्षा फीस का भुगतान नहीं किया था। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन ने दोनों ही कॉलेजों के करीब 200 विद्यार्थियों की परीक्षा नहीं लेने का फैसला लिया है। इससे इन विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
यदि कॉलेज के रवैये के कारण विद्यार्थी परीक्षा देने से वंचित रह जाते हैं तो, उनका एक साल खराब हो जाएगा। हैरानी की बात तो यह है कि कॉलेज प्रबंधन ने विद्यार्थियों से परीक्षा फीस ले रखी है, लेकिन यह फीस आगे कॉलेज में जमा नहीं कराई गई।
यह है मामला
परीक्षा के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन बीएड कॉलेज को प्रति विद्यार्थी चार हजार रुपये फीस परीक्षा केंद्र को भी देनी होती है। इन कॉलेजों ने इसमें गड़बड़ी की। इसके चलते परीक्षा केंद्र (राजकीय पीजी कॉलेज) के प्रबंधन ने तय कर लिया है कि विद्यार्थियों को परीक्षा नहीं देने दी जाएगी।
नहीं है मामले की जानकारी
मुझे मामले की जानकारी नहीं है। आज छुट्टी का दिन है इसलिए मैं कुछ भी बता पाने में सक्षम नहीं हूं। परीक्षा सोमवार को दोपहर बाद दो बजे से है। इस मामले पर सोमवार सुबह बात की जाएगी।
डॉ. हुकम सिंह, परीक्षा नियंत्रक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय भेज दी जानकारी
दो कॉलेजों की तरफ से फीस नहीं मिलने का मामला है। इन कॉलेजों ने पिछले साल की परीक्षा फीस भी नहीं भरी थी। यह मामला कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच का है, ऐसे में स्थिति से विश्वविद्यालय और बीएड कॉलेज के प्राचार्यों को अवगत करा दिया गया है। मैं सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।
डॉ. वीपी श्योराण, प्राचार्य राजकीय पीजी कॉलेज, जींद।
हां फीस नहीं भरे जाने का मामला मेरे संज्ञान में आया था। इसकी जानकारी प्रबंधन को दे दी गई है। अब तक तो फीस भरी भी जा चुकी होगी, लेकिन ऐसे परीक्षा देने से परीक्षा केंद्र प्रबंधन मना नहीं कर सकता।
डॉ. निर्मल सिंगरोहा, प्राचार्य आकाश एजुकेशन कॉलेज, गतौली।