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पौने 200 करोड़ के घाटे में चल रहा है शुगर मिल

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शुगर मिल का फाइल फोटो। - फोटो : bureau
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 घाटे में चल रहे शुगर मिल को संजीवनी का इंतजार है। शुगर मिल पर पौने 200 करोड़ रुपये ज्यादा का घाटा है, जो निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। शुगर मिल के घाटे में चलने का कारण गन्ने व चीनी के भाव में असमानता होना है। गन्ने का मूल्य जहां प्रति क्विंटल औसतन मूल्य 300 से ज्यादा है। वहीं चीनी का मूल्य 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच में रहता है। पिछले दिनों तो चीनी का मूल्य 26-27 रुपये प्रति किलोग्राम तक भी पहुंच गया था। चीनी के उत्पादन पर जो खर्च होता है, अगर उसके हिसाब से देखा जाए, तो चीनी का मूल्य कम से कम 45 रुपये प्रति किलोग्राम होना चाहिए।
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बिजली उत्पादन संयंत्र लगाने से मिल सकती है संजीवनी
घाटे में चल रहे शुगर मिल में अगर बिजली का उत्पादन किया जाए, एक संजीवनी मिल सकती है। पिछले दिनों शुगर मिल फेडरेशन ने केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह को बिजली उत्पादन संयंत्र लगवाने की मांग की थी। इसके अलावा शुगर मिल की क्षमता दोगुनी करने व एथेनाइल प्लांट लगाने की भी मांग की गई। फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश के अनुसार केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने उनकी मांग को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखने का आश्वासन दिया है। शुगर मिल की क्षमता फिलहाल प्रतिदिन साढ़े 12 हजार क्विंटल गन्ना पेराई करने की है।

केंद्रीय मंत्री ने दिया है आश्वासन
अगर शुगर मिल की पेराई क्षमता दोगुनी हो जाए और एथेनाइल प्लांट लग जाए, शुगर मिल का घाटा कम हो सकता है। साथ ही आमदनी के स्रोत भी बढ़ जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने उनकी मांग को प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिया है।
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शुगर मिल पहले से ही घाटे में चल रहा है। शुगर मिल की क्षमता बढ़ाने का फैसला सरकार के ही हाथ में है। पिछले दिनों मिल प्रबंधन द्वारा प्रस्ताव तो भेजा गया था।
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अजय मलिक, एमडी
शुगर मिल।


 
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