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बीमा कंपनियों ने 20 गांवों के फसल खराबे के सैंपल सर्वे पर हस्ताक्षर करने से किया इंकार

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20 गांवों की खराब हुई फसल के सैंपल सर्वे पर बीमा कंपनी ने हस्ताक्षर करने से किया इनकार
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों को अब अपनी खराब फसल का मुआवजा लेने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कंपनियों ने 20 गांवों की खराब फसल के सैंपल सर्वे पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। यही कारण है कि किसानों को मिलने वाला मुआवजा अधर में लटक गया है। हालांकि कृषि विभाग और बीमा कंपनी अधिकारी ऐसी बात से साफ इनकार कर रहे हैं, लेकिन कृषि विभाग द्वारा मुख्यालय को भेजा गया पत्र अमर उजाला के हाथ लगा है।
जिले में बाढ़ और भारी बारिश के कारण खराब हुई धान, बाजरा और कपास की फसल किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। बारिश के कारण खराब हुई फसलों की गिरदावरी कृषि विभाग और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रदेश सरकार के आदेशों के बाद करवाई गई थी। किसानों की फसल की गिरदावरी करवाने से लेकर बीमा कंपनियों द्वारा अब नुकसान का क्लेम देने तक किसानों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। कृषि विभाग में अधिकारी और कर्मचारियों की कमी के चलते सैंपल सर्वे करवाने का कृषि विभाग ने फैसला लिया था। इस दौरान जिले के ज्यादातर गांवों में सैंपल सर्वे ही कृषि विभाग और बीमा कंपनियों के कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से किया था। अब इस सर्वे को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों और बीमा कंपनी के बीच बड़ी रार आई है। जिले के 20 गांवों में कृषि विभाग द्वारा फसल के नुकसान की जो रिपोर्ट तैयार की गई है उसे बीमा कंपनियों ने स्वीकार करने से मना करते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद उप निदेशक कृषि विभाग ने निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से इसके बारे में पत्र लिखकर अवगत करवाया है।
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सैंपल सर्वे बना रार का कारण
बीमा कंपनी ने इन गांवों के लोगों को फसल का नुकसान का मुआवजा देने से यह कहकर मना कर दिया है कि कमेटी ने जो रिपोर्ट फसल के नुकसान की बनाई है इसमें इन गांवों का वास्तविकता से अधिक नुकसान दिखाया गया है। कंपनी और कृषि विभाग द्वारा इस नुकसान की रिपोर्ट पर जो रार आई है, उसका कारण सैंपल सर्वे माना जा रहा है।
बीमा कंपनी अधिकारी कर रहे मना
बीमा कंपनी के जिला को-आर्डिनेटर अनिल ने कहा कि इस प्रकार का कोई मामला नहीं है। जब उनसे लेटर की कॉपी होने की बात कही गई तो उन्होंने चुप्पी साध ली।
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जिला कृषि उप निदेशक ने सर्वे की सूची भेजी मुख्यालय
जिले के जिन 40 गांवों में सैंपल सर्वे कृषि विभाग ने करवाया था। उनकी सभी की रिपोर्ट निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण मुख्यालय चंडीगढ़ को भेज दी है। इसको लेकर आगामी कार्रवाई किसान कल्याण मुख्यालय चंडीगढ़ को करनी होगी।
सुरेंद्र मलिक, जिला कृषि एवं कल्याण विभाग उप निदेशक जींद
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