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2018 में एटीएम बदलकर पैसे निकालने के 95 मामले आए सामने, एक भी मामला नहीं हुआ ट्रेस

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एटीएम कार्ड बदलकर अब तक 95 लोगों के खाते से निकाले जा चुके हैं पैसे, पुलिस अधिकारी भी नहीं बचे, अभी तक एक की भी नहीं हुई गिरफ्तारी
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिले में एटीएम बदलकर या फोन पर एटीएम का नंबर व ओटीपी पूछकर 2018 में लोगों के खातों से रुपये निकालने की 95 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। साइबर क्राइम करने वालों ने आम नागरिक को ही नहीं बल्कि जिनके हाथ में सुरक्षा की व्यवस्था है उनको भी चूना लगा चुके हैं। मगर आज तक पुलिस सिर्फ मामले दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं कर पाई है। जनवरी से लेकर अभी तक हुए मामले में एक भी आरोपी को नहीं पकड़ पाई है। आए दिन हो रही साइबर क्राइम की घटनाओं से लोग चिंतित हैं। अधिकतर मामले जींद शहर के हैं। चूना लगाने वाले अधिकतर दूसरे प्रदेशों के लोग हैं, जिस कारण वह पकड़ में नहीं आ रहे हैं।
बैंकों के एटीएम जींद शहर में होने के कारण अधिकतर मामले जींद शहर थाना या सिविल लाइन थाना में दर्ज हुए हैं। जींद शहर थाना में इस प्रकार के इस वर्ष 21 मामले दर्ज हैं तो सिविल लाइन थाना में 19। 45 मामले सफीदों, जुलाना, नरवाना में दर्ज किए गए हैं। साइबर अपराधियों के शिकार आम आदमी ही नहीं बल्कि पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी भी हो चुके हैं। लोगों को अपना शिकार बनाने वाले ज्यादातर आरोपी दूसरे प्रदेशों के हैं। लोगों को चूना लगाने वाले ऐस अपराधी एटीएम केबिन के आसपास खड़े रहते हैं और लोगों की सहायता करने के नाम पर उनका एटीएम कार्ड बदल लेते हैं। इसके बाद वे उस खाते से पैसे निकाल लेते हैं। यह लोग अपने पास सभी बैंकों के एटीएम कार्ड रखते हैं। जिस बैंक का एटीएम कार्ड बदलते हैं, बदले में उसी बैंक का एटीएम कार्ड व्यक्ति को दे देते हैं। इसके अलावा फोन बैंकिंग के माध्यम से भी एटीएम का नंबर व ओटीपी पूछकर लोगों को चूना लगाया जाता हैं। फोन करने वाले अपने आपको बैंक मैनेजर बताकर एटीएम बंद होने की सूचना देकर लोगों से एटीएम कार्ड को रिन्यू करने के बहाने उसका नंबर व ओटीपी जान लेते हैं और उस खाते से पैसे दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं। जिस खाते में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं, वह खाता भी फर्जी होता है।
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जींद की अजमेर बस्ती और पिल्लूखेड़ा का रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भी हुआ शिकार
एटीएम कार्ड बदल कर रुपये निकालने वाले आरोपियों ने जींद की अजमेर बस्ती निवासी पूर्व एसआई रामनिवास का एटीएम कार्ड बदलकर छह जनवरी को उसके खाते से डेढ़ लाख रुपये निकाल लिए थे। रामनिवास ने कहा उसके खाते से 40 हजार रुपये को किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था। बार-बार पुलिस को कहने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी प्रकार पिल्लूखेड़ा निवासी रिटायर्ड एएसआई दिलबाग सिंह का एटीएम कार्ड बदलकर उसके खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए थे। दिलबाग सिंह ने कहा कि वह लोगों को इस प्रकार की धोखाधड़ी के बारे में बताया करता था, लेकिन वह खुद भी इसका शिकार हो गया।
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दूसरे प्रदेशों के लोग देते हैं घटनाओं को अंजाम
एटीएम कार्ड बदलकर या एटीएम कार्ड नंबर जानकार लोगों के खातों से पैसे निकालने वाले दूसरे प्रदेशों के होते हैं। जिन खातों में पैसा ट्रांसफर किया जाता है, वह अधिकतर बिहार, छत्तीसगढ़ या उत्तर प्रदेश के होते हैं। यह खाते भी फर्जी पाए जाते हैं। एटीएम कार्ड बदलने वाले लोग भी दूसरे प्रदेशों के होते हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज निकालकर जब पहचान करने का प्रयास करती है तो इनकी पहचान नहीं हो पाती। इस कारण एटीएम बदलने वाले लोग पुलिस की पकड़ में नहीं आ पाते। कई बार पुलिस दूसरे प्रदेशों में दबिश दे चुकी है। जिन खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं, वह भी फर्जी पाए जाते हैं। बैंक खातों में जो पता दिया जाता है, वह भी फर्जी निकलता है। आरोपियों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। फिर भी जांच की जा रही है। जल्द ही मामलों को हल कर लिया जाएगा।
पुष्पा खत्री, डीएसपी, जींद।
महीना मामले
जनवरी 8
फरवरी 9
मार्च 9
अप्रैल 7
मई 12
जून 10
जुलाई 11
अगस्त 8
सितंबर 3
अक्तूबर 5
नवंबर 3
दिसंबर 10
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