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बराह खुर्द में गिरा दो मंजिला मकान, टला बड़ा हादसा

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बारिश बनी आफत : बराह खुर्द में गिरा दो मंजिला मकान, बाप-बेटी घायल, दो पशुओं की मौत
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पीड़ित बोले, जिला मुख्यालय पर किया फोन नहीं मिला जवाब, स्वास्थ्य मंत्री को मामले से अवगत करवाया तो हरकत में आया प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिले में तीन से चार दिनों तक हुई बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। बारिश से जहां किसानों की फसलें खराब हो गई हैं और आए दिन हादसे हो रहे हैं। बराह खुर्द में लगभग तीन साल पहले बना मकान बारिश की वजह से वीरवार सुबह लगभग साढ़े पांच बजे ढह गया। हादसे के समय मकान में मौजूद मकान मालिक संदीप (30) और उनकी ढाई वर्षीय बेटी मन्नत मलबे में फंस गए। दोनों को ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला और नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हादसे के दौरान बरामदे में मौजूद बंधीं एक भैंस और एक बैल मलबे में दबने के बाद दो घंटे तक तड़पकर मर गए। ग्रामीणों ने हादसे की सूचना जिला प्रशासन को दी, लेकिन कहीं से समय पर कोई सहायता नहीं मिली।
ग्रामीण नरेंद्र ने बताया कि हादसे के बाद लगभग सवा छह बजे उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को फोन पर हादसे की सूचना दी। उन्होंने प्रशासन को शीघ्र भेजकर सहायता का आश्वासन दिया। इसके बाद भी लगभग दो घंटे तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। लगभग आठ बजे जिला के प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। मकान मालिक सुशील ने बताया कि हादसे से कुछ पल पहले ही उनकी पत्नी देविका पशुओं को चारा डालकर बाहर निकली थी। उसके बरामदे से बाहर निकलते ही मकान बुरी तरह से टूटकर गिर गया। देविका के शोर मचाने और मकान टूटने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही संदीप और उनकी बेटी मन्नत को बाहर निकाल लिया।
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घर का सारा सामान नष्ट
मकान मालिक सुशील ने बताया कि उनके मकान के अंदर रखा सारा सामान नष्ट हो गया। अब उनके पास न तो खाने को अनाज बचा है और न ही कोई बर्तन। उन्होंने बताया कि मकान में टीवी, अलमारी, कपड़े, वाशिंग मशीन, अनाज की टंकी, फ्रिज, डबल बेड सहित घर का पूरा सामान मलबे में दब गया।
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चार दिन बाद भी बारिश से प्रभावित क्षेत्र का आंकलन नहीं कर पाया प्रशासन
करीब दो लाख एकड़ फसल प्रभावित, 100 से अधिक गांवों में भरा है पानी
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। भले ही प्रशासन आपद प्रबंधन के दावे कर रहा है, लेकिन तीन दिन तक लगातार हुई बारिश ने दावों की पोल खोल कर रख दी है। बारिश रुकने के चार दिन बाद तक भी प्रशासन ने बारिश से प्रभावित हुई फसल व लोगों का आंकलन तक नहीं कर पाया है। जिले में करीब 100 गांव व दो लाख एकड़ फसल बाढ़ से प्रभावित है। ऐसे में लोगों को राहत मिलने पर भी संशय बना हुआ है।
शनिवार से सोमवार तक लगातार जींद में 111 एमएम बारिश हुई थी। इसके बाद सफीदों, पिल्लूखेड़ा, जींद व जुलाना ब्लॉक बुरी तरह प्रभावित हैं। इन ब्लॉकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। इन ब्लॉकों में हालांकि प्रशासन ने राहत का काम शुरू किया है, लेकिन आपदा के आगे यह काम बहुत ही कम पड़ रहा है। पिछले दो दिन से कई गांवों में लगातार पानी घुस रहा है। निडाना गांव के लोगों द्वारा बार-बार प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद पानी को रोकने व निकालने की काई व्यवस्था नहीं की गई। आखिरकार वीरवार दोपहर लोगों ने ढिगाना रोड को काट कर पानी की निकासी की व्यवस्था की।

12000 लोगों ने दी शिकायत
बारिश के कारण हुई तबाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला भर में 12000 किसानों ने बुधवार तक शिकायतें दी हैं। इसमें 9500 शिकायतें धान की फसल में पानी भरने की हैं, जबकि 2500 कपास की फसल में पानी भरने की।
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प्रशासन ने बारिश से प्रभावित क्षेत्रों का आंकलन कर रहा है। इसके लिए शुक्रवार दोपहर तक का समय दिया गया है। शुक्रवार को रिपोर्ट कंपाइल कर इसकी जानकारी तैयार की जाएगी। बचाव व राहत के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। एक साथ व्यापक स्तर पर बारिश होने से दिक्कत आ रही है।
- आरपी कटारिया, जिला राजस्व अधिकारी।

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