सफीदों पुलिस को एक मार्च तक खाली होगा किला
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। सफीदों पुलिस फिलहाल अपना अस्थायी ठिकाना ढूंढ रही है, क्योंकि हाईकोर्ट ने एक मार्च तक किले में बने पुलिस थाने को खाली करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में अब पुलिस को नया ठिकाना ढूंढने में काफी परेशानी आ रही है। हालांकि इसके लिए पुलिस प्रयास कर रही है।
सफीदों पुलिस थाना तूर राजाओं द्वारा बनाए गए ऐतिहासिक किले में चल रहा है। इसको लेकर दायर की गई याचिका पर हाईकोर्ट ने 11 फरवरी को आदेश दिया था कि किला खाली किया जाए। ऐसे में अब पुलिस नया ठिकाना ढूंढ रही है। इसके लिए पुलिस ने थाना के बिल्कुल पास लौय्या धर्मशाला, मार्केट कमेटी का पुराना कार्यालय, नई अनाज मंडी में मार्केट कमेटी की दूसरी मंजिल और बीडीपीओ कार्यालय का निरीक्षण किया। पुलिस की नजर अब-तक के सर्वे में बीडीपीओ कार्यालय पर टिकी हुई है। हालांकि बीडीपीओ पूनम चंदा और अकाउंट ने भी करीब दो पहले ही बिल्डिंग कंडम होने के कारण पास के नए भवन में अपना कार्यालय बनवाया है। वहीं डीएसपी सुनील कुमार के फिलहाल थाने के लिए पुराना बीडीपीओ ऑफिस ही सही लग रहा है, लेकिन यदि कोई और जगह अच्छी मिलती है तो वहां भी विचार किया जाएगा।
क्यों हो रहा सफीदों थाना खाली
पीडब्ल्यूडी विभाग के पूर्व एसडीओ यशपाल गुलिया ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की मांग की थी। इस याचिका पर जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की अदालत मेें सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि सिरसा के नजदीक रानियां किले में मौजूद पुलिस थाने को हटा दिया गया है। सफीदों के किले में स्थित पुलिस थाने को हटाने के लिए हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया था कि इस थाने को किले से हटाने के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशा जा रहा है। जगह मिलने ही किले से थाना हटा दिया जाएगा। 11 फरवरी को हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में किले से थाना हटाने के आदेश जारी किए थे।
की थी हिंदुओं की रक्षा
सफीदों निवासी बुजुर्ग चंद्र सिंह ने बताया कि यह किला पूरा इतिहास संजोए हुए है। तूर जाति के राजाओं ने इसे बनवाया था। जब आजादी मिली तो हिंदू और मुसलमान बीच हुए दंगों के दौरान कई हिंदुओं ने इस किले में शरण ली थी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की सबसे ऊंची जगह पर होने के कारण किले की दीवारों पर बैठे सैनिक आस-पास के सारे क्षेत्र पर नजर रखने का कार्य करते थे।
कभी होती थी तहसील, अस्पताल और जेल
जिस किले की दीवारों में आज पेड़ उग आए हैं, वहां कभी राजा की अदालत लगती थी। चंद्र सिंह ने बताया किले में राजा लोगों की समस्या सुनता था। बीमार सैनिकों का किले के अंदर ही इलाज करवाता और दोषी लोगों को यहां बनी जेल में रखा करता था। किले की दीवारें करीब पांच फुट चौड़ी हैं। अनदेखी के चलते आज यह किला खंडहर होने के कगार पर पहुंच गया है।
पुलिस कर रही है भवन की तलाश
निरीक्षण मेें फिलहाल तक बीडीपीओ ऑफिस को ही अस्थायी थाना के लिए जगह सुनिश्चित दिखाई दे रही है। बीडीपीओ ऑफिस की चारदीवारी ऊंची होने के साथ-साथ अन्य वाहन खड़े करने की जगह भी देखी जा रही है।
अजीत सिंह शेखावत, एएसपी।