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मुख्यमंत्री ने सुनी लोगों की समस्याएं, बार-बार शिकायत लेकर आने वालों को लगाई फटकार

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मुख्यमंत्री ने सुनी समस्याएं, बार-बार शिकायत लेकर आने वालों को लगाई फटकार
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जींद पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान दर्जनों लोगों ने उन्हें अपनी समस्याएं दीं, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को समाधान के आदेश दिए। वहीं बार-बार शिकायत लेकर आने वाले एक दंपती को फटकार भी लगाई।
सुबह करीब सवा दस बजे उन्होंने लोगों की समस्याएं सुननी शुरू की। इस दौरान अर्बन एस्टेट निवासी एक दंपती ने उन्हें पैसे हड़पने की शिकयत देकर कार्रवाई की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके मामले की जांच करवाई जा चुकी है। बार-बार शिकायत लेकर आते हैं। इसके बाद करेला गांव के लोगों ने उन्हें शिकायत दी कि गांव में जलभराव के मुआवजे के वितरण में धांधली के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने की शिकायत की। इस पर उन्होंने एसएसपी से मामला सौंप दिया। वहीं गढवाली गांव निवासी लोगों ने जलभराव की समस्या को उठाया। ग्रामीणों ने कहा कि ड्रेन की गहराई बढ़ाई जाए व इसके किनारे मजबूत किए जाएं। इस पर मुख्यमंत्री ने यह मामला डीसी को सौंप दिया। डीसी अमित खत्री ने बताया कि इस परियोजना पर काम चल रहा है।
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सिविल सर्जन पर लगे अनियमितताओं के आरोपों की होगी जांच
सोमवार को जन संघर्ष समिति के एक शिष्टमंडल ने सीएम मनोहरलाल से मुलाकात की। शिष्टमंडल ने सिविल सर्जन पर लगी अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग की। इस पर सीएम ने शिष्टमंडल को जल्द जांच करवाने का आश्वासन दिया।
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जन संघर्ष समिति के शिष्टमंडल ने आरोप लगाया कि जब से डॉ. संजय दहिया सिविल सर्जन बनकर जींद आए हैं, सरकार के नियमानुसार सेवा में प्रथम नियुक्ति के उपरांत स्थानीय स्तर पर मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र के ी बजाय 71 किलोमीटर दूर अग्रोहा के चक्कर कटवा रहे हैं, जबकि सरकार के नियम के अनुसार मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र स्थानीय स्तर पर ही बनाने होते हैं। शिष्टमंडल ने कहा कि इससे पूर्व सभी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जींद में ही बन जाते थे। इसके अलावा आउटसोर्सिंग एजेंसी को अस्पताल की सफाई एवं सुरक्षा का ठेका दिया गया है। वो ब्लैक लिस्ट हो चुकी एजेंसी घोषित हो चुकी है। इसकी फिजिबिलिटी भी नहीं थी। चौथे नंबर पर होने के बावजूद भी अवैध तरीके से ठेका दिया हुआ है। आउटसोर्सिंग के तहत लगे कर्मचारियों का ईएसआई व ईपीएफ भी जमा नहीं करवाया गया उसके बावजूद ठेकेदार को पेमेंट जारी की जा रही है।
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