संघर्षों के बीच सत्यनारायण लाठर का गुजरा पूरा जीवन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद/जुलाना। घर से अपने पेट्रोल पंप पर पैदल जा रहे पूर्व जन स्वास्थ्य मंत्री सत्यनारायण लाठर (60) को रविवार की शाम किसी वाहन चालक ने गाड़ी से टक्कर मार दी। जिससे वह हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें रोहतक के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया था। जहां उन्होंने देर रात दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया और अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को पूर्वमंत्री का अंतिम संस्कार जुलाना में कर दिया गया। लाठर ने 1977 में राजनीति की शुरुआत की थी और 1996 में विधायक बनकर मंत्री बने थे।
जुलाना निवासी पूर्व जन स्वास्थ्य मंत्री सत्यनारायण लाठर व उनके पेट्रोल पंप मैनेजर बलदेव रविवार देर शाम घर से खाना खाकर पैदल ही पेट्रोल पंप पर जा रहे थे। जब वह जींद-रोहतक मार्ग पर स्थित पेट्रोल पंप संकट मोचन के पास पहुंचे तो जींद से रोहतक की ओर जा रहे जा रहे किसी वाहन वाहन ने दोनों को टक्कर मार दी। इस टक्कर में सत्यनारायण लाठर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बलदेव को मामूली से चोटें आईं। दोनों को जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल करवाया गया। लाठर की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे रोहतक रेफर कर दिया। रात को उनका उपचार के दौरान पूर्वमंत्री की मौत हो गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को करीब 12 बजे जुलाना में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में विधायक जगबीर मलिक, पूर्व मंत्री कुलबीर सिंह, प्रो. धर्मेद्र ढुल, जगबीर ढिगाना, जिला युवा उपाध्यक्ष रोहित दलाल, प्रदेश सचिव धर्मपाल कटारिया, सरपंच एसोसिएशन के प्रधान राजेश गोयत, सत्यवान खटकड़, मार्केट कमेटी चेयरमैन विष्णु शर्मा, कांग्रेस नेता मनजीत लाठर, आनंद लाठर, सितेंद्र ढुल, बसाऊ लाठर, दिनेश जामनी, जुलाना थाना प्रभारी रोहताश ढुल समेत हजारों लोगों मौजूद थे।
19 वर्ष की आयु में की थी राजनीति शुरू, 1996 में बने थे विधायक
सत्यनारायण लाठर का जीवन संघर्ष भरा रहा है। 19 वर्ष की आयु में वर्ष 1977 में सत्यनारायण लाठर राजनीति आ गए थे। एक कार्यकर्ता के रूप में समर्पित सत्यनारायण लाठर के जुनून व उत्साह को देखकर 1989 में उपप्रधानमंत्री देवीलाल अचानक बिना किसी कार्यक्रम के सत्यनारायण लाठर के घर पर पहुंच गए थे। लाठर की दयनीय पारिवारिक स्थिति को देखकर व आगे बढ़ने का उत्साह देखकर उपप्रधानमंत्री रहे देवीलाल ने उन्हें कान्फेड का चेयरमैन बना दिया था। वर्ष 1991 के चुनाव में जुलाना विधानसभा से सत्यनारायण लाठर को देवीलाल ने प्रत्याशी घोषित कर दिया था। बाद में पार्टी के टिकट पर सूरजभान काजल चुनाव लड़ाया गया। उस समय सत्यनारायण लाठर ने हिम्मत नहीं हारी और निर्दलीय चुनाव लड़ा था। थोड़े से वोटों से ही सत्यनारायण लाठर सूरजभान काजल से हार गए थे। इसके बाद वर्ष 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से विधायक बने थे। चौधरी बंसीलाल ने लाठर की मेहनत व लग्न को देखते हुए जनस्वास्थ्य मंत्री बना दिया था। जुलाना क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को देखते हुए सत्यनारायण लाठर हलके के विकास के लिए 286 करोड़ रुपये उस समय मुख्यमंत्री रहे बंसीलाल से लेकर आए थे और जुलाना का नया बस स्टैंड व रामकली माइनर का निर्माण कार्य समेत दर्जनों विकास कार्य करवाए। इसके बाद उन्होंने इनेलो का दामन थाम लिया था। इनेलो से टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वर्ष 2014 में बीरेंद्र सिंह के साथ ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। करीब दो वर्ष के बाद भाजपा को छोड़कर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ कांग्रेस में आ गए थे।
संघर्षपूर्ण रहा पूर्वमंत्री का जीवन, परिवार में बचा केवल एक चिराग और दो महिलाएं
सत्यनाराण लाठर का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। लाठर को जीवन में काफी दुखों का सामना करना पड़ा। 1995 में सड़क हादसे में सत्यनारायण लाठर के बेटे संजय की मौत हो गई थी। उस समय संजय करीब 19 वर्ष के थे और अविवाहित थे। इसके बाद वर्ष 2007 में उनके दूसरे लड़के जितेंद्र का भी निधन हो गया था। 26 नंवबर 2016 को सत्यनारायण के पोते एवं जितेंद्र के बेटे रोहित की भी अचानक बीमारी से मौत हो गई। अब केवल परिवार का एक चिराग बचा है। सत्यनारायण लाठर की मौत के बाद परिवार में विधवा पुत्रवधू और सत्यनारायण लाठर की पत्नी और एक 18 साल का पोता जितेंद्र का बेटा मोहित बचा है। पूर्व मंत्री की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।