तीन ब्लॉक की 20 हजार एकड़ जलमग्न, दस हजार एकड़ में गेहूं की बिजाई पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली के कारण खेतों में भरे बारिश के पानी की वजह से तीन खंडों के किसानों ने अपनी धान की फसल को खो चुके हैं। अब उनको गेहूं और सरसों की फसल से भी हाथ धोना पड़ सकता है। सरकार ने प्रशासन को किसानों के खेतों में भरे पानी को निकालने के आदेश दिए हैं, लेकिन यह आदेश अभी तक सरकारी फाइलों तक ही सीमित हैं। जिले में बारिश की चपेट में करीब 20 हजार एकड़ फसल आई है। खेलों में भरा पानी निकालने के लिए अभी तक धरातल पर नाममात्र ही काम शुरू हो पाया है। जुलाना, पिल्लूखेड़ा और अलेवा खंड में खेतों में भरे दो से चार फुट पानी की निकासी कई जगह पर शुरू भी नहीं सकी है।
जिले में इन खंडों समेत अन्य खंडों में भी कई जगह जलभराव है। इस जलभराव के चलते आगामी समय में लगभग दस हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में गेहूं और दो हजार एकड़ में सरसों की बिजाई नहीं हो पाएगी। इसके साथ-साथ सरकार सैंपल सर्वे भी शुरू नहीं करवा पाया। इस सर्वे के लिए एक तो विभाग के पास अधिकारियों की कमी नहीं है। दूसरी तरफ सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान है। सैंपल सर्वे नहीं होने के कारण किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान होगा। धान की फसल को पूरी तरह से नष्ट होने से बचाने के लिए किसानों में जैसे-तैसे करके उसे काटने का काम भी किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जो धान की फसल किसानों से सर्वे से पहले काट ली उसके नुकसान के आंकलन के लिए अभी तक विभाग के पास कोई गाइड लाइन नहीं आई है। सैंपल सर्वे के तहत 25 प्रतिशत खराब हुई फसलों का खेत में जाकर मुआयना करना होता है। इसके बाद गांव में बाकी खराब हुई फसल को इसी आधार पर मान्य किया जाता है। विभाग द्वारा अगर यह सर्वे अब भी शुरू किया जाए तो लगभग दो महीने में पूरा होगा। इसके विपरीत गेहूं की फसल की बिजाई नवंबर में शुरू हो जाती है। कृषि विभाग के इस ढीले रवैये के कारण किसानों को भारी नुकसान होने की उम्मीद है।
30 ट्रैक्टर लगे हैं खेतों से पानी निकालने के लिए, फिर भी पानी नहीं हो रहा कम
24 सितंबर को क्षेत्र में हुई बारिश से हुए जलभराव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 16 दिनों से लगाता पानी की निकासी कर रहीं मोटरें एवं ट्रैक्टरों से करीब आधा फुट ही पानी का स्तर कम हो पाया है। अभी भी ड्रेेनें ओवरफ्लो होकर चल रही हैं। सुंदर ब्रांच नहर पर शामलो कलां गांव में बने पंप हाउस पर पानी की निकासी करने के लिए 400 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से 37 ट्रैक्टर चल रहे हैं। करेला पंप हाउस पर 30 ट्रैक्टर पानी बरसात के पानी की निकासी पंपों से कर रहे हैं निकाल रहे हैं। शामलो कलां पंप हाउस पर 80-80 एचपी की पांच, 50 एचपी की दो, 15-15 एचपी की छह, 20-20 एचपी की तीन मोटरें पानी निकालने में लगी हैं। बारिश के 16 दिन बाद भी केवल आधा फुट ही पानी निकल पाया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर ऐसी तरह काम चलता रहा तो 10 दिनों के अंदर पानी निकाल देंगे। करेला पंप हाउस पर 80 क्यूसिक पानी निकाला जा रहा है और 30 ट्रैक्टर लगे हुए हैं।
एसडीएम कर देते हैं सरपंच को मार्क, सरपंचों ने खड़े किए हाथ
अपने खेतों से पानी निकालने के लिए तेल की मांग किसान कर रहे हैं। इसके लिए किसान अप्लीकेशन लिखकर एसडीम के पास लेकर जा रहे हैं और खेतों का पानी अपने साधनों से निकालने के लिए तेल की मांग कर रहे हैं। एसडीएम यह एप्लीकेशन सरपंचों को मार्क कर देते हैं। जब किसान सरपंच के पास पहुंचते हैं तो वे कहते हैं कि पेट्रोल पंप मालिकों ने सरपंचों को तेल देना बंद कर दिया है। पेट्रोल पंप मालिक रुपये मांग रहे हैं। सरपंचों ने कहा कि प्रशासन ने तेल लेने के लिए पेट्रोल पंप निश्चित करने चाहिए। किसान पानी निकालने के लिए धक्के खा रहे हैं।
पंचायत के पास तेल खरीदने के रुपये नहीं हैं। पेट्रोल पंप मालिकों ने भी उधार पर डीजल देना बंद कर दिया है। प्रशासन को एक पेट्रोल पंप निश्चित करके उसी से तेल खरीदना चाहिए, ताकि किसान अपने खेतों का पानी अपने साधनों से खरीद सकें।
स्नेह लता, सरपंच शामलो कलां।
पंप हाउसों पर पानी तेज गति से निकाला जा रहा है। पानी का स्तर कम हुआ है। 8 या 10 दिनों के अंदर पानी को निकाल दिया जाएगा। शामलो कलां पंप हाउस 80-80 एचपी की पांच, 50 एचपी की दो, 15-15 एचपी की छह, 20-20 एचपी की तीन मोटर व 37 ट्रैक्टर पानी निकला रहे हैं। करेला में भी मोटरे व 30 ट्रैक्टर लग रखे हैं।
विकास, जेई शामलो कलां पंप हाउस।