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अस्थायी से स्थायी हुई नंदीशाला, अब हो सकेंगे ऑपरेशन भी

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जागा प्रशासन: नंदीशाला में अलग केटेगरी में रहेंगे पशु, मिलेंगी सुविधाएं
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
लगातार लावारिस गोवंश की मौत और बीमार होने के चलते जिला प्रशासन अब चेता है। जयंती देवी मंदिर के सामने अस्थायी तौर पर शुरू की गई नंदीशाला को प्रशासन ने रजिस्टर्ड करवाकर स्थायी बना दिया है। इसके बाद व्यवस्था बेहतर करने की भी तैयारी शुरू हो गई है। दो शेड बने हैं तो तीसरा बनकर तैयार है। इसके बाद एक और शेड बनाया जाएगा। नंदीशाला में 10 खोर बनाने के अलावा 10 तालाब बनाए जाएंगे। इसके अलावा पशुओं के इलाज की सारी व्यवस्था यहां की जाएगी। यहां तक की पशुओं के ऑपरेशन भी यहां संभव हो सकेंगे। फिलहाल गोवंश को ठंड से बचाने के लिए कोई भी पर्याप्त साधन नहीं हैं।
शहर की पशुओं की समस्या को देखते हुए अप्रैल-मई में जयंती मंदिर के सामने अस्थायी नंदीशाला शुरू की गई थी। करीब 10 एकड़ में बनी नंदीशाला में फिलहाल करीब साढ़े तीन हजार लावारिस पशु है। इनमें ज्यादातर सांड़ और बछड़े ही हैं। कुछ गाय भी है, जिन्हें गोशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। अस्थायी नंदीशाला को अब प्रशासन ने रजिस्टर्ड करवा दिया है। अब यह नंदीशाला रेलवे रोड के रूप में जानी जाएगी। एसडीएम इसके चेयरमैन होंगे। स्थायी होने के बाद अब इसमें पशुओं की बेहतर व्यवस्था के लिए काम शुरू हो गया है। दो शेड इसमें पहले ही हैं और तीसरे का काम चल रहा है। जल्द ही एक और शेड बनाया जाएगा। करीब 10 खोर बनाई जाएंगी। पीने के पानी की व्यवस्था के लिए 10 छोटे तालाब बनाए जाएंगे और सबमर्सिबल कनेक्शन होगा।
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कैटेगरी वाइज अलग-अलग होंगे पशु
नई व्यवस्था के अनुसार सभी पशुओं को कैटेगरी अनुसार अलग-अलग रखा जाएगा। कमजोर और बीमार अलग रहेंगे और उनके चारे और इलाज की विशेष व्यवस्था होगी। पूरी तरह स्वस्थ पशुओं को अलग रखा जाएगा।

67 गांव, हर महीने एक गांव से पांच ट्राली चारे की उम्मीद
शहर के सभी पशुचारा दुकान संचालकों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके है कि वे पशुचारा खुले में पशुओं को डालने की बजाए गोशाला में पहुंचाए। अब प्लान बन रहा है कि 67 गांवों से ऐसी व्यवस्था की जाए कि हर महीने पांच-पांच ट्राली पशुचारा प्रत्येक गांव दें। इससे पशुओं के पशु चारे की परेशानी को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा दानवीर लोग चंदा भी खूब दे रहे है। अब तक चंदे से चारा ही खरीदा जा रहा है। अगर ग्रामीण पशुचारा देते है तो इस चंदे की राशि को नंदीशाला में बेहतर व्यवस्था बनाने में खर्च किया जा सकेगा।

नहीं थम रहा मौत का सिलसिला
अस्थायी नंदीशाला बनने के बाद से ही यहां लावारिस पशुओं की मौत का सिलसिला चल रहा है। हालांकि अब इसमें कमी आई है। मगर फिलहाल भी चार लावारिस पशु इसमें मृत पड़े हैं और करीब आधा दर्जन ऐसे है जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पशु चिकित्सकों डा. राजू, डॉ. बलवंत सिंह ने शनिवार को सभी पशुओं के स्वास्थ्य की जांच की और बीमार का इलाज किया। उन्होंने बताया कि पशुओं की मौत का कारण पॉलीथिन खाना है। लोग घरों में खाद्य सामग्री पॉलीथिन में लाते है और फिर सब्जियों के पत्ते व अन्य कचर पॉलीथिन से ही बाहर फेंक देते हैं। पशुओं को थैली से खाने की महक आती है और उसके लालच में पूरी पालीथिन को ही खा लेते है। एक पशु के पेट से बहुत ज्यादा पालीथिन निकाली गई है। इसके अलावा कुछ पशु उम्र ज्यादा होने के कारण दम तोड़ देते है।
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हांसी रोड पर भी रहेगी स्थायी नंदीशाला
प्रशासन की ओर से हांसी रोड पर भी स्थायी नंदीशाला बनाई गई है। इसमें करीब एक हजार लावारिस पशु हैं। वहां भी लावारिस पशुओं के लिए व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा ब्रीड के पास ही चार एकड़ जगह में भी लावारिस पशुओं को रखा गया है।
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