अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
जिले में मानसून दस्तक देने को तैयार है और प्रशासन अभी तक हाथ बांधे बैठा है। मानसून के दौरान सबसे अधिक परेशानी पानी निकास की होती है, लेकिन जलभराव से बचने के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई है। शहर के नाले गंदगी से पटे पड़े हैं। इससे शहर को लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। तीन दिन पहले ही महज 26 एमएम बारिश से शहर तालाब में बदल गया था।
असल में शहर में बरसाती पानी निकासी की व्यवस्था है ही नहीं। सामान्य सीवर लाइन के जरिये ही जन स्वास्थ्य विभाग बरसाती पानी को पंप से लिफ्ट कर कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजता है। शहर के सीवेज के साथ बरसाती पानी भी मिलने से करीब 40 साल पुरानी सीवरेज व्यवस्था हांफ जाती है। नतीजा यह होता है कि शहर की सड़कों से लेकर कॉलोनियों की गलियों तक में पानी भरा रहता है। इसकी निकासी में प्रशासन को आठ से दस घंटे लग जाते हैं। अर्बन एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड, स्कीम नंबर पांच व छह, भारत सिनेमा से कन्या स्कूल की तरफ, रामबीर कालोनी, रोहतक रोड की सभी कॉलोनियां, शिव कॉलोनी की मुख्य सड़कों पर बरसात के दौरान लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है। पानी निकासी के लिए फिलहाल गोहाना रोड, बाल भवन रोड, सफीदों रोड, रानी तालाब के साथ, एसडी स्कूल पर नाले बनाए गए हैं। सफाई नहीं होने से ये नाले बारिश के पानी की निकासी की बजाय आफत का कारण बन सकते हैं।
यूं समझें शहर की निकासी व्यवस्था
शहर का बरसाती पानी तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स में जाता है। इसमें हांसी रोड स्थित जन स्वास्थ्य विभाग का 15 एमएलडी, गोहाना रोड पर हुडा का दस एमएलडी और नरवाना रोड पर जनस्वास्थ्य विभाग का पांच एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं। नरवाना रोड सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पटियाला चौक क्षेत्र का ही पानी जाता है। वहीं, अर्बन एस्टेट और नए सेक्टरों का पानी गोहाना रोड पर जाता है। इसके अलावा पूरे शहर का पानी हांसी रोड स्थित 15 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जाता है। इसके लिए तीन बूस्टर काम करते हैं। इसके तहत पहले रोहतक रोड क्षेत्र का पानी निकाला जाता है। इसके बाद बस स्टैंड बूस्टर से पानी उठाया जाता है। इसमें स्टेडियम बूस्टर का पानी भी साथ चलता है। इसके बाद काठ मंडी बूस्टर को चलाया जाता है। ऐसे में भटनागर कॉलोनी बूस्टर और काठ मंडी बूस्टर का नंबर बहुत देरी से आता है। जब तक आधा शहर बारिश के पानी से घिरा रहता है।
सीवर मारते हैं बैक
बरसाती पानी की निकासी देरी से होने के कारण सीवरेज लाइन में पानी की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इससे सीवरेज व्यवस्था हांफ जाती है और घरों में सीवर बैक मारने लगते हैं। इसके चलते लोगों का घरों में रहना आफत बन जाता है।
नहीं होती सफाई
नालों की कभी भी सफाई नहीं होती। बारिश के दिनों में दड़े से आने वाले पानी के तेज बहाव के कारण यहां काफी पानी एकत्रित हो जाता है। इससे घरों में भी पानी घुस जाता है। प्रशासन को बारिश से पहले सफाई करवानी चाहिए।
रमेश, सफीदों गेट
बिना बारिश भी नहीं चलते सीवर
शहर की सीवरेज व्यवस्था की हालत बहुत ही दयनीय है। सुबह-सुबह जब घरों से पानी निकलता है तो सीवरेज बैक मारने लगता है। बारिश के दिनों में तो पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है।
सुंदर दलाल, शिव कॉलोनी
शहर में सीवर लाइनों की लगातार सफाई की जा रही है। मानसून से पहले पूरे शहर को कवर कर देंगे। इसके लिए योजना तैयार की गई है। डिस्पोजल पंपों को तैयार किया जा रहा है।
हरभजन सिंह, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग।
शहर की निकासी व्यवस्था कौन संभाले, गंदगी से अटे नाले
मानसून दस्तक देने को तैयार, अब तक नहीं हुई नालों की सफाई
26 एमएम बारिश से शहर के कई इलाकों में हो गया था जलभराव