फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्ज माफी ऐसा है, जैसे कैंसर के मरीज को डिस्प्रिन की गोली दे दें : बृजेंद्र सिंह

विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों की कर्ज माफी कैंसर के मरीज को डिस्प्रिन की गोली देने के समान: बृजेंद्र सिंह
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
जींद। सीआरएसयू में रविवार को कई किसान संगठनों ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर किसान सम्मेलन का आयोजन किया। कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे राजनीतिक तौर पर मजबूत बने। किसानों की कर्ज माफी के बारे में उन्होंने कहा कि यह समस्या का समाधान नहीं है। यह कुछ इस तरह से हैं जैसे कैंसर के मरीज को डिस्प्रिन की गोली दे दो। किसान को खुशहाल बनाने के लिए अर्थव्यवस्था में उसका हिस्सा बढ़ाना होगा। कार्यक्रम में बृजेंद्र सिंह ने चौधरी चरण सिंह के जीवन के बारे में बताया कि उन्होंने किस प्रकार राजनीतिक सीढ़िया चढ़ी और देश के किसानों के लिए नई नीतियां बनाई। उन्होंने कहा कि देश की कृषि व्यवस्था में तीन चरण हैं। इनमें सबसे पहला चरण सर छोटूराम द्वारा किसानों को उबारने के लिए बनाई गई मंडी व्यवस्था, दूसरा चौधरी चरण सिंह द्वारा जमींदारी व्यवस्था को समाप्त करना और तीसरा हरित क्रांति का चरण है। इसमें चौधरी चरण सिंह का काम महत्वूपर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि आज देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 साल तक के युवाओं की है और 50 प्रतिशत आबादी 25 साल तक के युवाओं की है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान महज 16 प्रतिशत है। इसे बढ़ाने की जरूरत है और कृषि बजट में भी इजाफा करना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों के कर्ज माफ करना समस्या का स्थायी हल नहीं है। हर 15-20 साल में कर्ज माफी हो जाती है, लेकिन किसान की हालत नहीं सुधरती। सरकारी खर्च का हिस्सा कृषि पर अधिक खर्च होना चाहिए। इस मौके पर संजीव बुआना, नीमल भनवाला, टेकराम कंडेला, सोमबीर पहलवान, सज्जन सिंह, हरेंद्र डूमरखां, धर्मबीर भनवाला मौजूद रहे।
मैंने नहीं की खेती
जिस प्रकार केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह को अपने स्पाट लहजे के लिए जाना जाता है, ठीक उसी प्रकार बृजेंद्र सिंह ने भी बिना किसी लाग-लपेट के मंच से स्वीकारा कि उन्होंने कभी खेती नहीं की। किसान सम्मेलन में जब लोग उनके लिए नारे लगा रहे थे, तब उन्होंने कहा, ‘होली हो तो मैं शुरू करूं।’ इस पर लोगों ने खूब ठहाके लगाए।
विज्ञापन

मंडल आयोग ने किसानों को किया खंडित
बृजेंद्र सिंह ने कहा कि जब भी देश में बड़ा किसान आंदोलन या नेता उभरता है, उसे दबा दिया जाता है। यही कारण है कि 1990-91 के बाद की अर्थव्यवस्था में देश का किसान आर्थिक व राजनीतिक तौर पर खंडित हुआ। किसानों को मंडल आयोग ने भी आघात पहुंचाया। चौधरी चरण सिंह की कल्पना थी कि किसान को आर्थिक तौर पर मजबूत किया जाए, जो राजनीतिक बल के बिना संभव नहीं है।
तीन साल की मेहनत से मिली आईएएस की नौकरी
कार्यक्रम के दौरान जब आयोजकों ने उन्हें नौकरी छोड़कर राजनीति में आने को कहा तो उन्होंने कहा कि आईएएस की नौकरी उन्हें, तीन साल की मेहतन के बाद मिली है। अब 20 साल की नौकरी में राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद उन्हें राजनीति में नहीं आने दिया। उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें लोगों ने लालच भी दिया, लेकिन अपनी विरासत को देखते हुए उन्होंने उस लालच को ठुकरा दिया।
भाषण में अफसरी झलक
बृजेंद्र सिंह भले ही राजनीति में आने की बात को टाल गए हों, लेकिन उनका राजनीतिक सफर अब शुरू माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने किसान सम्मेलन में बहुत ही सधे हुए शब्दों का प्रयोग किया और इस दौरान उनके भाषण में अफसरी शब्दावली भी झलकी। बृजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने जेएनयू से पढ़ाई की है। ऐसे में उन्होंने बार-बार अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग किया और फिर उन्हें खोलकर बताया। इसी दौरान एक बार तो उन्होंने पास खड़े लोगों से ही पूछ लिया कि लेगेसी को क्या कहते हैं।
विज्ञापन

पाकिस्तान स्थित सर छोटूराम का घर हो राष्ट्रीय धरोहर घोषित
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पाकिस्तान के लाहौर के मॉडल टाउन में सर छोटूराम का घर है। इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए। इसके लिए पाकिस्तान सरकार से मांग की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें