नौ माह से दिव्यांगता सर्टिफिकेट के लिए काट रहे चक्कर, नहीं मिला
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाओं के कारण पिछले नौ महीने से दिव्यांग अपने सर्टिफिकेट बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन दावा कर रहा है कि प्रत्येक बुधवार को 80 से 100 लोगों के सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं। दिव्यांग लोग इस सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी सहायता या योजनाओं का लाभ लेने के लिए तरसते रहते हैं, लेकिन कभी मेडिकल बोर्ड पूरा नहीं होने व कभी कागजात पूरे नहीं होने के कारण उनके चक्कर कटवाए जा रहे हैं। नागरिक अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ नहीं होने के कारण दिव्यांगों के अग्रोहा मेडिकल कॉलेज या रोहतक पीजीआई तक के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। यहां सरकार का दिव्यांगों को मुख्य धारा में लाने का सपना चकनाचूर हो रहा है।
नागरिक अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को दिव्यांगों के सर्टिफिकेट बनाए जाने का दिन निर्धारित है। सप्ताह में केवल एक ही दिन दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं। सरकार ने इसमें पारदर्शिता लाने के लिए टोकन सिस्टम भी शुरू किया हुआ है। इस समय जो टोकन लोगों को सर्टिफिकेट बनवाने के लिए दिया जा रहा है, उसके अनुसार दिसंबर अंतिम सप्ताह की तारीख दी जा रही है। इस हिसाब से एक महीने बाद आज टोकन मिलने वाले व्यक्ति का सर्टिफिकेट बन जाना चाहिए, लेकिन नागरिक अस्पताल की व्यवस्था इतनी चरमराई हुई है कि यहां नौ-नौ महीने बाद भी दिव्यांगता सर्टिफिकेट नहीं बन रहे हैं। हर बुधवार सैकड़ों लोग नागरिक अस्पताल में अपने दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आते हैं। इतनी ही संख्या में इनके परिजन इनको सहारा देने आते हैं। एक तो दिव्यांग ऊपर से बार-बार चक्कर कटवाने के कारण इन लोगों को मानसिक व शारीरिक पीड़ा होती है। यहां आकर सरकार की दिव्यांगों को मुख्य धारा में लाने की योजना धराशायी हो जाती है।
नागरिक अस्पताल में नहीं पूरा मेडिकल बोर्ड
दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित है। इसमें एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक ईएनटी, एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, एक फिजीशियन, एक जनरल सर्जन, एक मनोरोग विशेषज्ञ की ड्यूटी होती है। नागरिक अस्पताल में फिलहाल ईएनटी, नेत्र रोग विशेष, मनोरोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इनकी व्यवस्था दूसरे अस्पतालों से की गई है। कभी रोहतक से तो कभी अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से इन विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। इसके बावजूद भी एकआध बार एक-दो विशेषज्ञ इस बोर्ड में शामिल नहीं हो पाता। इस कारण भी दिव्यांगता सर्टिफिकेट लटकते रहते हैं।
60 लोगों को दिए जाते हैं कूपन
जो लोग अपना दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाने के लिए नागरिक अस्पताल में आते हैं, उनको टोकन दिया जाता है। नागरिक अस्पताल में कागजातों की जांच के बाद प्रत्येक बुधवार के लिए 60 लोगों को टोकन दिया जाता है। इस बुधवार जिन लोगों को टोकन दिए गए हैं उनके दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में सर्टिफिकेट बनाए जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद नौ-नौ महीने पहले मिले टोकन वाले लोगों के अभी तक दिव्यांगता सर्टिफिकेट नहीं बन पाए हैं।
पांच महीने बाद भी नहीं बना कार्ड
मैं पांच महीनेे से चक्कर काट रहा हूं, लेकिन अभी तक मेरा दिव्यांग सर्टिफिकेट नहीं बना है। अधिकारी कागजात में कमी बता कर बार-बार चक्कर कटवा रहे हैं। चक्कर काटकर मैं थक गया हूं। बहुत ही योजनाओं का लाभ लेने से में वंचित हूं।
राजकुमार।
जरूरतमंद को बार-बार आने में दिक्कत
सात महीने के बाद भी दिव्यांगता कार्ड नहीं बना। हर बार चिकित्सक कह देता है कि अगली बार कार्ड बन जाएगा। जब आते हैं तो सिर्फ झूठे आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता। जरूरतमंद लोगों का जल्द से जल्द कार्ड बनना चाहिए। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में बार-बार काम छोड़ कर घर से आना मुश्किल हो जाता है।
निशा।
सप्ताह में दो या तीन दिन बनने चाहिए कार्ड
सप्ताह में केवल बुधवार को एक दिन ही दिव्यांगों के सर्टिफिकेट बनते हैं। ऐसे में बुधवार को भारी संख्या में दिव्यांग कार्ड बनवाने के लिए पहुंचते हैं। जिस कारण सभी दिव्यांगों के कार्ड नहीं बन पाते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि कार्ड बनवाने के लिए सप्ताह में दो या तीन दिन सुनिश्चित किए जाएं, जिससे दिव्यांगों को चक्कर नहीं काटने पड़े।
विजय।
ऐसा नहीं हो सकता कि नौ-नौ महीने से लोग दिव्यांगता सर्टिफिकेट के लिए चक्कर काट रहे हो। एक-दो बार चिकित्सकों की कमी के कारण कुछ देरी जरूर हो सकती है। दिव्यांगों को बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ें, इसके लिए दूसरे मेडिकलों से चिकित्सक बुलाकर मेडिकल बोर्ड पूरा किया जाता है।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।