जींद। नगर परिषद में ठेकेदार के अधीन सफाई करने वाले 124 कर्मचारियों कोचार महीने से वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी है। इससे शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। हालांकि नगर परिषद के पास 128 नियमित सफाई कर्मचारी भी हैं लेकिन इनमें से अधिकतर अधिकारियों के यहां तैनात किए गए हैं। ऐसे में सफाई का अधिकतर काम ठेके के कर्मचारियों को ही संभलवाया गया है।
ठेके में गड़बड़ी की दी थी शिकायत
गौरतलब है कि ठेके के कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। दरअसल ठेके के लिए आवेदन करने वाले अनिल राणा ने ठेके में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए निदेशक शहरी निकाय को शिकायत दी थी। इस मामले की जांच लोकायुक्त में चल रही है। अनिल राणा का आरोप है कि उन्होंने भी ठेके के लिए टेंडर दिए थे और सिंगल टेंडर होने के बावजूद उनके टेंडर रद्द कर सामान्य फार्म को टेंडर दिया गया जबकि नियमानुसार प्राथमिकता अनुसूचित जाति के लोगों की फर्म को दी जानी चाहिए। ऐसे में यह मामला लटका हुआ है। इस पर शहरी निकाय विभाग द्वारा ठेकेदार को पेमेंट रोकने का पत्र जारी हुआ और पिछले साल नवंबर महीने से ही ठेकेदार को भुगतान रोका गया है। ऐसे में अब पिछले चार महीने से सफाई कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है और शनिवार से उन्होंने हड़ताल शुरू कर दी। इससे शहर में सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। वहीं गर्मी को मौसम होने के कारण हालात और भी बदतर हो चले हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते न तो गलियों में सफाई हो रही है और न ही कूड़ा कलेक्शन सेंटर से कूड़ा उठ पा रहा है।
यह मामला मुख्यालय में विचाराधीन है। स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। पैसे जारी करने के लिए निदेशक को बार-बार पत्र लिख चुके हैं लेकिन पैसे नहीं आए हैं।
अरुण कुमार, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जींद।