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सोमवती अमावस्या आज --149 साल बाद बना अद्भुत संयोग, शनि जयंती के दिन हैं सोमवती अमावस्या

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जींद। इस बार सोमवार को सोमवती अमावस्या है और 149 साल बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। इस बार शनि जयंती और ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या एक साथ है। इसके साथ ही वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा। ज्योतिषविदों के मुताबिक इस बार की शनि जयंती लोगों के लिए खास रहेगी। इसके साथ ही एक दिन तीन शुभ आयोजन होने के चलते इसका महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। ऐसा संयोग 149 वर्ष बाद बनने जा रहा है। इससे पहले यह संयोग 30 मई 1870 को बना था। दुर्गा भवन के पंडित मनोज मिश्रा ने बताया कि जिन राशियों में शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है। उनके लिए यह दिन विशेष रहेगा। साथ ही वह लोग इस विशेष संयोग के बीच भगवान शनि की पूजा कर लाभ उठा सकते है। शनि जयंती के दिन सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। जिसका प्रभाव 24 घंटे तक रहेगा। इस दिन पूजा पाठ करने से विशेष प्रकार का फल मिलेगा। माना जाता है कि इस दिन सूर्य व छाया पुत्र शनि का जन्म हुआ था। सूर्य और चंद्रमा जब वृषभ राशि में होते हैं तो उस समय शनि जयंती मनाई जाती है। इस साल शनि धनु राशि में वक्री होकर गोचर हो रहे हैं। शनि के साथ केतू के गोचर का भी योग है।
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पांडू पिंडारा गांव के पिंडतारक तीर्थ पर सोमवार को हजारों की संख्या में पहुंचकर हजारों श्रद्घालु आस्था की डूबकी लगाएंगे। सोमवती अमावस्या पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डूबकी लगाएंगे और पिंडदान कर अपने पितृ की शांति की कामना करेंगे। भीषण गर्मी के बीच एक दिन पहले ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए। इस बीच एक दिन पहले ही पंडित भी पहुंच गए और गर्मी से बचने के लिए दिनभर छाता लिए बैठे रहे। सोमवती अमावस्या को मध्यनजर पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हुए है। दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, यूपी से दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते है और अपने पितृ की शांति के लिए पिंड दान करते है। पांडू पिंडारा गांव के पिंडतारक तीर्थ पर सोमवार को सोमवती पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डूबकी लगाएंगे और पिंडदान कर अपने पितृ की शांति की कामना करेंगे।
ऐसे करें शनि देव की पूजा
पंडित रामगोपाल ने बताया कि लोग शनिदेव जयंती पर उपवास भी रखते हैं। खासकर उपवास करने वालों को विधिवपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के लिए साफ लकड़ी की चौकी पर काले रंग का कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर शनिदेव की प्रतिमा को स्थापित करें। शनि देव को पंचामृत व इत्र से स्नान करवाने के बाद कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल अर्पित करें। इसके बाद पूजा करने के दौरान भगवान शनि मंत्र की माला का जाप करना चाहिए। उन्होंने बताया कि शनि देव कर्मदाता व न्याय प्रिय देव हैं। जिस राशि में भगवान शनि का प्रवेश होता है। उसे धर्म व अध्यात्म की पालना करते हुए समाज में न्याय करना चाहिए। भगवान शनि देव अच्छे कर्म करने वालों को बेहतर और बुरे कर्म वालों की बुरे परिणाम देते हैं।
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महाभारत कालीन से जुुड़ा है पांडू पिंडारा
पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ काफी प्राचीन तीर्थ है और इस तीर्थ का संबंध महाभारत कालीन से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पितृों के तर्पण के लिए पिंडदान करने पिंडारा आए थे लेकिन तब सोमवती अमावस्या का संयोग नहीं बना। ऐसे में पांडवों ने सोमवती अमावस्या को श्राप दिया था कि वह कलयुग में बार-बार आएगी। इसके बाद से हर अमावस्या के अवसर पर इस तीर्थ पर मेला लगता है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पर स्नान व पिंडदान करने के लिए पहुंचते हैं।
70 ड्रम रखे जाएंगे अमावस्या के दिन
तीर्थ का पानी को खराब होने से बचाने के लिए सामाजिक संगठनों ने तीर्थ स्थल पर 70 ड्रम रखे जाएंगे। इससे जो भी श्रद्धालु पिंडदान करेगा तो वह पिंड ड्रम में छोड़ना होगा। इससे तीर्थ में पल रही मछलियां भी जीवत रह सकेंगी और पानी भी गंदा नहीं होगा। पिछली बार भी सोमवती अमावस्या के दिन ही ड्रम रखे गए थे और ड्रम रखने के बाद सफाई व्यवस्था भी बनी रहती है।
पिंडारा में खोली अस्थायी पुलिस चौकी
सिविल लाइन थाना प्रभारी जगदीश चंद्र ने कहा कि पुलिस ने श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पिंडारा गांव में अस्थाई पुलिस चौकी खोली है। इसके साथ-साथ लगभग 500 पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वाहनों के आवागमन ठीक ढंग से हो इसके लिए ट्रेफिक पुलिस की भी व्यवस्था की गई है। पिंड तारक तीर्थ में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस ने गोताखोरों का भी इंतजाम किया है। पुलिस की एक नौका तीर्थ में हर समय गश्त पर रहेगी।
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