नरवाना। शहर में काटी जा रही अवैध कॉलोनियों पर बुधवार को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन पर जेसीबी चलवा दी। दोपहर में जिला नगर एवं योजनाकार ललित कुमार के नेतृत्व में भारी पुलिस बल के साथ टीम नरवाना पहुंची और ढाकल रोड के निकट रजवाहे पर काटी गई कॉलोनी पर कार्रवाई की। यहां नए बन रहे कई मकानों को भी गिरा दिया गया। इस दौरान तहसीलदार अजय कुमार बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट मौजूद रहे। उचाना के डीएसपी दलीप सिंह, शहर थाना प्रभारी संजय कुमार भी मौजूद रहे। महिला पुलिस भी तैनात रही। डीटीपी की टीम ने दो जेसीबी की मदद से अवैध निर्माण गिराए।
जेसीबी ने पहले प्लाटों में भरी गई नीवों को गिराया और फिर इसी कॉलोनी में बने तीन मकानों को तोड़ दिया। जैसे ही जेसीबी ने मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की तो मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने अधिकारियों से मकानों को नहीं गिराने की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारी नहीं माने। इस पर कुछ लोगों ने विरोध किया। कुछ समय के लिए पुलिस व लोगों के बीच झड़प भी हुई। बाद में पुलिस ने सख्ती दिखाकर लोगों को मौके से हटा दिया।
डीटीपी ललित कुमार ने कहा कि नरवाना में चार अवैध कॉलोनियों का निर्माण करके अवैध निर्माणों को गिराने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कॉलोनियों में किए जा रहे अवैध निर्माण को रोकने के लिए विभाग ने पहले भी कई बार नोटिस दिए थे, लेकिन लोगों ने अवैध निर्माण का कार्य नहीं रोका, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। डीटीपी ने कहा कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ विभाग का अभियान निरंतर जारी रहेगा और कहीं पर भी अवैध कॉलोनी को नहीं काटने दिया जाएगा।
पूरी जिंदगी की जमा पूंजी से बनाया था मकान
जेसीबी की मदद से नए मकानों को गिरा रही थी तो एक महिला और उसकी बेटी जेसीबी के आगे खड़ी हो गई। महिला व उसकी बेटी की आंखों से आंसू निकल रहे थे। लगातार अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रही थी। महिला ने अधिकारियों को बताया कि कि पूरी जिंदगी की जमा पूंजी से मकान बनाया जा रहा है, लेकिन प्रशासन अवैध कॉलोनी का हवाला देकर तोड़ने में व्यस्त रहा। महिला ने उसके साथ ज्यादती करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके मकान के आसपास कई और मकान बने हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत से बनी कॉलोनी, कैसे हुई रजिस्ट्री
यहां मकान बना रहे बलदेव राज ने बताया कि वह वेल्डिंग की दुकान चलाता है । पूरी जिंदगी की जमा पूंजी से मकान बनाया था। बलदेव ने कहा कि उसे अवैध कॉलोनी के बारे कोई पता नहीं, लेकिन जब तहसीलदार कार्यालय से इस जगह की रजिस्ट्री की गई है तो कॉलोनी अवैध कैसे हो गई। वहीं डीटीपी ने पूरे मामले की जांच की बात कही है।