अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा लेदर केमिकल फैक्टरी में रविवार को हुई आग की घटना ने जिले भर के सरकारी और गैरसरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अमर उजाला ने जब इसकी पड़ताल की तो पाया कि हरियाणा लेदर केमिकल फैक्टरी ने मई 2017 के बाद अग्नि शमन विभाग से फैक्टरी की अग्नि सुरक्षा की एनओसी ही नवीकरण नहीं करवाई है। अकेली हरियाणा लेदर केमिकल ही नहीं जिलेभर के अधिकतर सरकारी व गैरसरकारी प्रतिष्ठानों ने फायर सुरक्षा के लिए एनओसी नहीं ली है। इससे अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
नियमानुसार हर संस्थान को प्रतिवर्ष अग्निशमन विभाग से फायर सुरक्षा इंतजामों के लिए एनओसी लेनी होती है, लेकिन प्रशासन की ढिलाई व लोगों की लापरवाही के चलते इस नियम को ताक पर रखा जा रहा है। इससे हजारों जानें खतरे में हैं। हैरानी की बात है कि जहां जिले के सबसे बड़े अधिकारी डीसी व एसएसपी बैठते हैं उस लघु सचिवालय में भी अग्नि सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। लघु सचिवालय में प्रतिदिन अपने काम करवाने के सैकड़ों लोग आते हैं। इतना ही नहीं शहर के नागरिक अस्पताल में जहां प्रतिदिन हजारों मरीज व उनके तिमारदार आते हैं, वहां भी अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। इसके लिए जिला अग्निशमन अधिकारी से एनओसी नहीं ली गई है। फिलहाल जिले में अधिकतर स्कूलों और होटलों द्वारा ही एनओसी ली गई है। अग्निशमन कार्यालय के सूत्रों के अनुसार स्कूलों को मान्यता की निरंतरता के लिए एनओसी जमा करवानी होती है। ऐसे में स्कूल एनओसी लेते हैं।
लघु सचिवालय में जर्जर पड़ा सिस्टम
लघु सचिवालय में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया गया है, लेकिन कई सालों से यह जर्जर हालत में है। यहां तक कि लघु सचिवालय में अलार्म सिस्टम भी काम नहीं कर रहा है। पानी के टैंक व फिटिंग की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह चालू हालत में नहीं हैं।
नए भवन की एनओसी के लिए नहीं हुआ आवेदन
नागरिक अस्पताल का नया भवन करीब छह महीने से प्रयोग में है। अधिकतर ओपीडी व मरीजों के पंजीकरण से लेकर दवा वितरण का पूरा काम नए भवन में ही होता है। इसकेे बावजूद इस भवन के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम की एनओसी नहीं लगी गई है। हालांकि भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम लगे हैं, लेकिन जरूरत पड़ने वह काम करने की स्थिति में नहीं हैं।
विभाग के पास कार्रवाई का अधिकार नहीं
हरियाणा लेदर केमिकल फैक्टरी के पास एनओसी नहीं है। विभाग से एनओसी लेनी जरूरी होती है। जिला अग्नि शमन विभाग के पास ऐसे अधिकार नहीं हैं कि इन संस्थाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाए। जो एनओसी लेता है, उसे जांच के बाद नियम पूरे करने पर एनओसी दे दी जाती है।
-ताराचंद सैनी, जिला अग्नि शमन अधिकारी।
यह हैं अग्नि सुरक्षा के नियम
अग्नि सुरक्षा के नियम प्रतिष्ठा के आकार व काम के हिसाब से तय होते हैं। छोटे प्रतिष्ठानों में आग बुझाने के लिए केमिकल पाउडर वाले सिलिंडर का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन 500 वर्ग मीटर से अधिक बड़े संस्थान में एक लाख लीटर पानी का टैंक होना चाहिए, और इससे आग बुझाने के लिए पूरी फिटिंग जरूरी होती है। इसके अलावा 3.5 प्रति वर्ग किलोमीटर के प्रेशर से पानी डालने की सुविधा होनी चाहिए। इसके अलावा पेट्रोल पंपों और रसोई गैस के गोदामों में मल्टी लेयर सुरक्षा व्यवस्था होती है।
ली है एक्सपलोसिव एनओसी
फैक्टरी में ज्वलनशील पदार्थ होते हैं, ऐसे में इसके लिए एक्सपलोसिव एनओसी ली गई है। अग्नि शमन विभाग से एनओसी पिछले साल ली थी। एक्सपलोसिव एनओसी कंपनी के पास है।
-एमके सिंह, प्रबंधक, हरियाणा लेदर केमिकल।
एमसी एक्ट में अग्नि शमन अधिकारी के पास कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। यह बेहद गंभीर मामला है। इसका संज्ञान लिया जाएगा। पता लगाया जाएगा कि क्या जिला अग्नि शमन अधिकारी कार्रवाई के लिए सक्षम है या नहीं। सभी बड़े प्रतिष्ठानों व फैक्टरियों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाएगा।
-अमित खत्री, डीसी।