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एनसीआर में होने के कारण ग्रीन पटाखों की होगी बिक्री, पटाखों की जांच कर ही लाइसेंस देगा प्रशासन

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दिवाली पर ग्रीन पटाखों की होगी बिक्री, लाइसेंस देगा प्रशासन
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। दिवाली पर आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के चलते पटाखे बिक्री को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दरअसल प्रदूषण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी काफी सख्ती की गई है और ऐसे में जींद एनसीआर का हिस्सा होने के कारण यहां ग्रीन पटाखों की ही बिक्री होगी। इसके चलते प्रशासन भी पटाखा विक्रेताओं को लाइसेंस देने में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। अभी जींद में 84 लोगों ने, नरवाना में सात व जुलाना में चार लोगों ने पटाखे बचने के लिए लाइसेंस का आवेदन किया है। इस पर शुक्रवार को प्रशासन लाइसेंस के लिए ड्रा निकालेगा।
हालांकि जींद शहर में हर बार 100 से अधिक स्टाल लगते हैं। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन लाइसेंस मिलने में हो रही देरी के चलते पटाखा विक्रेताओं को परेशानी हो रही है। जींद में पटाखा व्यापारी रोहतक व कैथल से आतिशबाजी खरीदते हैं और दिवाली से करीब 15 दिन पहले ही उन्हें माल उठाना होता है। वहीं लाइसेंस नहीं होने के कारण व्यापारियों को अवैध रूप से आतिशबाजी स्टोर करनी पड़ती है। इससे पटाखा व्यापारियों को प्रशासनिक कार्रवाई का भी डर सताता रहता है।
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बॉक्स
करीब तीन करोड़ रुपये का है कारोबार
जिला में हर साल दिवाली के मौके पर करीब तीन करोड़ रुपये के पटाखों की सेल होती है। जींद व सफीदों में सबसे अधिक स्टाल लगते हैं। इसके अलावा नरवाना में भी स्टाल अलाट किए जाते हैं, लेकिन अधिकतर सेल स्टालों से बाहर ही होती है। अकेले जींद शहर में दो करोड़ रुपये के पटाखे बेचे जाते हैं।
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वर्जन
इस बार सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण रोकने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इससे पटाखों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। यदि पटाखा विक्रेताओं के पास अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे होंगे तो पटाखे नहीं बेचने दिए जाएंगे। स्टाल आबंटन की प्रक्रिया जारी है। शुक्रवार को इसके लिए ड्रा किया जाएगा।
- वीरेंद्र सहरावत, एसडीएम, जींद।
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