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राज्यपेज के लिए प्रस्तावित विधायक परमेंद्र ढुल का आरोप, सरकार शिक्षा विभाग में निजीकरण की तरफ बढ़ा रही कदम

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विधायक ढुल का आरोप, शिक्षा विभाग में निजीकरण की तरफ कदम बढ़ा रही सरकार
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। निजीकरण के मुद्दे पर कर्मचारियों का गुस्सा झेल रही प्रदेश सरकार पर अब जुलाना से इनेलो विधायक परमेंद्र सिंह ढुल ने भी शिक्षा के क्षेत्र में सरकार पर व्यापक स्तर पर निजीकरण करने के आरोप लगाए हैं। विधानसभा से प्राप्त जानकारी के आधार पर विधायक ढुल ने दावा किया कि पिछले तीन साल में हर छह दिन में प्रदेश में एक सरकारी स्कूल बंद हुआ है, जबकि हर दूसरे दिन एक निजी स्कूल खोला गया है।
शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में विधायक ने कहा कि प्रदेश सरकार चंद व्यवसायी घरानों के हाथों में खेलते हुए सोची समझी नीति के तहत सरकारी शिक्षा व्यवस्था को निजीकरण की ओर ले जा रही है। विधायक ने कहा कि उन्होंने विधानसभा की गतिविधियों के माध्यम से अप्रैल 2015 से अब तक की जानकारी हासिल की है। इस दौरान प्रदेशभर में कुल 208 सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। इसी अवधि में प्रदेशभर में कुल 974 निजी स्कूल खुले हैं। कैथल जिले में सबसे ज्यादा 36 सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। वहीं इसी दौरान भिवानी में 74, हिसार में 85 तथा गुरुग्राम में 94 में सबसे अधिक प्राइवेट स्कूल खुले हैं। जींद जिले में 12 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जबकि 28 प्राइवेट स्कूल खुले हैं।
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बढ़ी है विद्यार्थियों की संख्या
विधायक ढुल के अनुसार 2017 में प्रदेशभर में 315900 छात्र दसवीं और 210867 12वीं की परीक्षा में बैठे थे, जबकि मार्च 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर दसवीं के लिए 364800 और 12वीं के लिए 222388 रहा था। इससे स्पष्ट होता है जहां एक तरफ विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार घट रही है और प्राइवेट स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
महज 77 स्कूल हुए अपग्रेड
उन्होंने कहा की अप्रैल 2015 से लेकर अब तक केवल 77 स्कूल अपग्रेड किए गए हैं। यह भी गत वर्ष जब एक-एक करके अपग्रेडेशन की मांग को लेकर स्कूलों की छात्राएं तथा अभिभावक धरने पर बैठे थे। अंबाला, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, पलवल और यमुनानगर जैसे जिलों में एक भी स्कूल अपग्रेड नहीं हुआ है।
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गिरा है शिक्षा का स्तर
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 या उससे पहले के मुकाबले वर्ष 2018 तक न केवल पास होने वालों की संख्या में लगातार गिरावट आई है, बल्कि नकल के केस भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षक व अध्यापकों को पराली की जांच, पंचायती व गैर शिक्षा के सरकारी कार्य, मंदिर पूजन, चुनावी जिम्मेदारी जैसे अन्य काम सौंप रखे हैं। इसका असर परिणाम पर साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में दसवीं में 61 व 12वीं में 73 फीसद विद्यार्थी पास हुए। भाजपा शासन के गत चार वर्षों में दसवीं में 49.09 व 12 वीं में 61.15 प्रतिशत छात्र ही पास हो सके हैं।
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