अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पेंशन बहाल संघर्ष समिति नेे रविवार को मांगों के लिए प्रदर्शन करते हुए तहसीलदार प्रवीण कुमार को ज्ञापन सौंपा। धरने की अध्यक्षता पेंशन बहाल संघर्ष समिति के प्रधान वजीर गांगोली ने की। इसमें सभी विभागों के कर्मचारी मौजूद थे। इससे पहले सभी कर्मचारियों ने जाट धर्मशाला में बैठक की। बैठक के बाद कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की कोठी के पास पहुंचे और उसका घेराव किया। कर्मचारियों ने हाथों में सरकार के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां उठा रखी थीं।
गांगोली ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2004 व प्रदेश सरकार द्वारा 2006 से कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर अंशदायी पेंशन योजना लागू की। जो शेयर मार्केट के जोखिम पर आधारित है। नई पेंशन व्यवस्था में कर्मचारियों के वेतन व महंगाई भत्ते की 20 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा निजी क्षेत्रों में लगाना अन्याय पूर्ण है। बाजार आधारित व्यवस्था होने के कारण इसमें किसी भी तरह की रिटर्न गारंटी नहीं है। इस कारण यह व्यवस्था कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा को समाप्त करती है। नई पेंशन स्कीम कर्मचारियों के लिए लाभदायक नहीं है। इसमें समस्त विभागों के कर्मचारी व अधिकारी अपने भविष्य को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पीएफआरडीए किसी भी राज्य सरकार को पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की इजाजत देता है। त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में आज भी पुरानी पेंशन स्कीम लागू है। इसलिए हरियाणा प्रदेश में भी पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए। जिससे कर्मचारियों को सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा प्रदान हो सके। अगर कर्मचारियों की मांगों को जल्द ही पूरा नहीं किया गया तो सात अक्तूबर को करनाल में सीएम के आवास का घेराव किया जाएगा। तहसीलदार ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि जल्द ही कर्मचारियों की मांगों का ज्ञापन सीएम को सौंप दिया जाएगा। इस अवसर पर वजीर गांगोली, सोनिया, सपना, विजेंद्र, अनूप लाठर, सुनील, सुरेंद्र, देवीलाल, अजीत व बलराज मौजूद रहे।