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लगाया प्रेमानंद पर गलत प्रचार करने के आरोप

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साधु समाज ने मुझे गद्दी पर बैठाया: परमेश्वरानंद
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। बाबा दूधाधारी हरिगिरि गोशाला और समाध आसन गिरि गोसाई उचाना कलां में गद्दी को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को जींद में महंत स्वामी परमेश्वरानंद गिरी ने गद्दी पर दावा करते हुए कहा कि साधु समाज व आसपास के गांवों के लोगों ने उनको गद्दी पर बैठाया है, लेकिन पिछले दो दिनों से स्वामी प्रेमानंद अपने आपको उचाना के इस डेरे की गद्दी का मोहतमीम चुने जाने का प्रचार कर रहे है, जोकि गलत है। प्रेमानंद ने जो डेरे का संपत्ति हड़पने के लिए षड्यंत्र किया था उसे साधु समाज ने सिरे नहीं चढ़ने दिया। डेरे की परंपरा अनुसार महंत के देहावसान के बाद उसका उत्तराधिकरी महंत का चेला या उनका गुरू भाई ही बैठ सकता है जबकि प्रेमानंद न तो उनका शिष्य है और न ही वो उनका गुरू भाई है। प्रेमानंद तो कब्जधारी है जिसने हरिद्वार डेरे के साथ-साथ डेरे की कई संपत्तियों पर अपना कब्जा किया है। स्वामी परमेश्वरानंद गिरि शहर के अन्नक्षेत्र में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। स्वामी परमेश्वरानंद गिरि ने बताया कि सात अक्टूबर को समाध आसन गिरि गोसाई पर उन्हें उचाना कलां व आसपास के गांवों के हजारों लोगों व दूर-दराज से आए सैकड़ों साधुओं की मौजूदगी में महंत बनाया गया। उन्होंने बताया कि इसी दिन कनखल हरिद्वार से आए एक खड़यंत्रकारी व्यक्ति प्रेमानंद जो अपने आपको संत कहता ने डेरे पर कब्जा करने का प्रयास किया। यहां मौजूद सैंकड़ों लोगों वा संतो ने उसकी ये मंशा सिरे नहीं चढ़ने दी। उन्होंने पुलिस को इसकी शिकायत दी जिस पर पुलिस व जिला प्रशासन ने उनका सहयोग किया। उन्होंने प्रेमानंद पर आरोप लगाते हुए कहा कि सब जानते है कि उसने वर्षों पहले कनखल के श्री भारती विद्यालय, हरि भारती नेत्र चिकित्सालय में महामंडलेश्वर स्वामी गणेशानंद को जो कि वहां के महंत थे को बंदूक के बल पर बाहर कर अपना कब्जा कर लिया था। तभी स्वामी गणेशानंद उचाना आ गए थे और अब वह उसी मंशा से डेरे की जमीन, प्रोपर्टी हथियाने के उद्देश्य से उचाना आया था जिसे साधु समाज ने सिरे नहीं चढ़ने दिया। महंत स्वामी परमेश्वरानंद गिरि ने कहा कि स्वामी गणेशांनद, महंत कृष्णानंद के जो सपने शिक्षा के क्षेत्र को लेकर थे उन सपनों को पूरा किया जाएगा। उनके द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो जिम्मेदारी साधु समाज, गांव के लोगों ने सौंपी है वो उस पर खरा उतरने का काम करेंगे। स्वामी गणेशानंद महाराज, महंत कृष्णानंद द्वारा जो डेरे, शिक्षण संस्थाओं की उन्नती के लिए सपने देखे थे उन्हें पूरा करेंगे। महंत स्वामी दलेलगिरि व महंत स्वामी रामचन्द्र गिरि ने कहा कि प्रेमानंद एक आपराधिक प्रवृति का व्यक्ति है जिस पर अनेक मुकदमे चल रहे है। इन्होंने कहा कि प्रेमानंद पुरी निवार्णी परंपरा का है जबकि डेरा गिरियों का है। इस अवसर पर काकडौद आश्रम के महंत स्वामी रामचन्द्र गिरि, उचाना नगर पालिका के चेयरमैन रमेश श्योकंद, पार्षद विकास श्योकंद, आढ़ती साधुराम, समाजसेवी जितेंद्र, रामकिशन, पार्षद अनिल नागपाल, अन्नक्षेत्र के प्रधान महेश सिंगला मौजूद थे।
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ग्रामीणों व साधु समाज ने उनको ही गद्दी सौंपी है। कुछ लोग डेरा की संपत्ति को हड़पने की मंसा से आए थे, लेकिन ग्रामीणों ने उसको पूरा नहीं होने दिया। ग्रामीणों ने उनको ही चादर ओढ़ाकर गद्दी पर बैठाया है। प्रशासन का दबाव बनाकर भी उनको भगाने का प्रयास किया था, लेकिन उसमें भी सफल नहीं हो सके। इसलिए गद्दी वही बैठे है। उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार है।
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स्वामी प्रेमानंद महाराज।
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