अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
नई परिवहन नीति का विरोध कर रहे रोडवेज कर्मचारियों ने मंगलवार को फिर से चक्का जाम कर दिया। इससे जींद डिपो की 200 बसें नहीं चल सकीं और डिपो को करीब 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ। हड़ताल के कारण यात्री दिन भर परेशान रहे और धूप में बस स्टैंड के बाहर घंटों निजी वाहनों का इंतजार किया।
प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई नई परिवहन नीति के आधार पर जिला में 64 रूटों पर निजी बसों को परमिट जारी किए गए हैं। इसके विरोध में पिछले दो महीने से कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। दो महीने में चार बार जींद डिपो बंद हो चुका है। मंगलवार को फिर से रोडवेज कर्मचारियों की सभी सातों यूनियनों के आह्वान पर चक्का जाम रहा। इससे यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। लोग निजी बस और मैक्सी कैब से अपनी मंजिल तक पहुंचे। जींद डिपो की बसें प्रतिदिन करीब 30 हजार यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं और 12 लाख रुपये की कमाई करती हैं।
ये है कर्मचारी यूनियनों की आपत्ति
रोडवेज कर्मचारी यूनियन नई परिवहन नीति का विरोध कर रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नई नीति में सरकार ने निजी बस ऑपरेटरों को मन मर्जी के रूट पर बस चलाने की अनुमति दी है। इसमें बसों की संख्या भी तय नहीं है, जिससे अधिक निजी बसें शामिल हो सकती हैं।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
वर्कशॉप के बाहर धरना देकर रोडवेज कर्मचारियों ने विरोध जताया। रोडवेज कर्मचारियों ने कहा कि नई परिवहन नीति के विरोध में सरकार से दो बार बातचीत हो चुकी है। सरकार ने वादा किया था कि अदालत में नई नीति को वापस लेने का हलफनामा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं किया। कर्मचारी यूनियनों से बातचीत के बावजूद सरकार नई परिवहन नीति को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में नई नीति वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
यूं शुरू हुआ विवाद
रोडवेज कर्मचारियों के मुताबिक, जींद के परिवहन अधिकारी ने रोडवेज की सहमति के बिना निजी बस ऑपरेटरों को टाइम टेबल जारी कर दिया, जबकि इसमें रोडवेज अधिकारी भी शामिल होने चाहिए। इसको लेकर नौ अप्रैल को पहली बार रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। इसके बाद से चार बार चक्का जाम हो चुका है।
नरवाना रोडवेज के कर्मचारियों ने किया बसों का चक्का जाम
नरवाना: नई परिवहन नीति को लेकर नरवाना डिपो के रोडवेज कर्मचारियों ने मंगलवार को बसों का चक्का जाम किया। इस कारण बस स्टैंड सुनसान रहा। सरकारी बसें बंद होने के कारण दिनभर दिल्ली-पटियाला हाईवे पर जाम लगा रहा। कर्मचारी रामनिवास, पालाराम, जसमेल, ईश्वर, दलबीर, वीरेंद्र, जगदीप, सत्यवान, सुखदेव, विरेंद्र ने कहा कि सरकार अपने वादों से मुकर रही है और रोडवेज विभाग का निजीकरण करने पर तुली है।
सफीदों में हड़ताल कर कर्मचारियों ने की नारेबाजी
निजी बस संचालकों की मनमानी से नाराज सफीदों रोडवेज डिपो के कर्मचारियों ने मंगलवार को पूर्ण रूप से हड़ताल रखी। कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हड़ताल का नेतृत्व यूनियन के प्रधान रविंद्र ने किया। रविंद्र ने कहा कि निजी बस संचालक मनमानी करते हैं, ये लोग ना तो सरकार की ओर से बनाए गए पास लागू कर रहे हैं और ना ही सरकारी की अन्य योजनाओं को मानते हैं।
इस बार होगी आरपार की लड़ाई
सरकार हर बार कर्मचारियों को झूठा आश्वासन देकर हड़ताल खुलवाती है और फिर से नई परिवहन नीति को आगे बढ़ाया जाता है। ऐसे में इस बार कर्मचारी आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। जब तक नई नीति वापस नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी।
अजीत नहरा, रोडवेज कर्मचारी संघर्ष समिति सदस्य।
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण रोडवेज को करीब 12 लाख रुपये की आमदनी का नुकसान हुआ है। कर्मचारी यूनियन और परिवहन मंत्री के बीच बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि हड़ताल समाप्त हो जाएगी।
एमएस खर्ब, महाप्रबंधक जींद डिपो
रोडवेज बसों का चक्का जाम, जींद डिपो को लगा 12 लाख का फटका
दिन भर भटकते रहे यात्री, निजीकरण का विरोध कर रहे हैं कर्मचारी संगठन