16जेएनडी23: उचाना में खाद बीज की सरकारी दुकान जहां पर किसानों को डीएपी मिल रहा है। संवाद
जींद। जिले में धान के सीजन में किसानों को शुरुआती दौर में ही डीएपी के लिए किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि फिलहाल किसानों को कम ही डीएपी की जरूरत है, लेकिन यह भी नहीं मिल पा रहा।
कृषि विभाग के रिकाॅर्ड में तो 1301 एमटी डीएपी है, लेकिन यह मिलता कहीं नहीं। जिले में धान के सीजन में 18000 एमटी डीएपी की जरूरत किसानों को होती है।
जरूरत के अनुसार जिले में अभी तक डीएपी नहीं पहुंचा है। किसानों की जरूरत को देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों ने 2600 एमटी डीएपी की मांग के लिए पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक यह नहीं पहुंचा। डीएपी के लिए पिल्लूखेड़ा, नरवाना, अलेवा और जुलाना क्षेत्र में किसानों को ज्यादा परेशानी हो रही है।
इसके अलावा उचाना में किसानों को जरूरत के अनुसार एक से दो बैग फिलहाल दिए जा रहे हैं। अभी तक ज्वार, कपास व धान की पनीरी में ही डीएपी की जरूरत है। दुकानों पर डीएपी के स्थान पर एमपीके किसानों को देने की बात कही जा रही है, लेकिन किसान इसको लेने से पीछे हट रहे हैं।
किसान जिले सिंह ने बताया कि वह पिल्लूखेड़ा मंडी में पिछले एक सप्ताह से चक्कर काट रहा है, लेकिन उसको डीएपी नहीं मिल रहा। इसके अलावा किसान राकेश ने बताया कि धान की पनीरी के लिए भी पिल्लूखेड़ा में डीएपी नहीं है। अगर आगामी 10 दिन में डीएपी सभी सरकारी दुकानों पर नहीं पहुंचा तो इसके लिए मारामारी का डर रहेगा। बीते सीजन में भी यूरिया व डीएपी को लेकर किसानों को ज्यादा परेशानी हुई थी।