जींद। ठंड की दस्तक देते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। हालांकि इस बार पराली जलाने के मामले पिछले साल के मुकाबले काफी कम आए हैं, लेकिन शहर व आसपास के क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों से उड़ रही धूल से हवा की तासीर खराब हो गई है। इसके चलते शुक्रवार को हवा में पीएम 10 मानक स्तर 296 तक पहुंच गया, जबकि यह सामान्यतौर पर महज 100 होना चाहिए। वहीं पीएम 2.5 मानक स्तर 40 तक होना चाहिए, लेकिन यह 67 तक पहुंच गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जींद की फिजा कितनी जहरीली हो चुकी है। इसके चलते अस्पताल में अस्थमा मरीजों की संख्या की भी बढ़ रही है।
दरअसल जींद शहर में सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। इसके अलावा अर्बन एस्टेट की गलियां उखाड़ी गई हैं। इतना ही नहीं जींद के बाईपास पर भी मिट्टी डालने का काम चल रहा है। वहीं शहर से बाहर सभी सड़कों पर काम चल रहा है। इसमें पांडू पिंडारा गांव के पास कई जगह से सड़क उखाड़ी गई है। यहां दिनभर वाहनों के आने से धूल उड़ती रहती है। इसके चलते हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है।
होना चाहिए पानी का छिड़काव
जहां निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां नियमानुसार सुबह-शाम पानी का छिड़काव होना चाहिए, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते ठेकेदार पानी का छिड़काव नहीं कर रहे हैं। इसके चलते रात-दिन धूल उड़ रही है। वहीं मिट्टी ढोने वाले वाहन भी मिट्टी को बिना ढके ढो रहे हैं। इससे भी पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
अस्पताल में आ रहे हैं 100 से अधिक मरीज
पिछले तीन-चार दिन में जींद व आसपास की हवा काफी जहरीली हो रही है। इसके चलते नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन अस्थमा के 100 मरीज पहुंच रहे हैं। इतने ही मरीज आंखों में जलन की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
अब बढ़ रहे हैं पराली जलाने के केस
कृषि विभाग के अनुसार पराली जलाने के केस इस बार काफी कम आ रहे हैं, लेकिन शुक्रवार को इसमें काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में अब जिले की फिजा और अधिक जहरीली होनी तय है। शुक्रवार तक जिले में 350 जगह पराली जलाई गई, जो पिछले साल दो नवंबर तक 475 थी। इसमें से 48 लोकेशन अकेले शुक्रवार को ही आई हैं। अब प्रशासन इनको नोटिस भेज रहा है।
यूं बढ़ा प्रदूषण का स्तर
पिछले सप्ताह तक जिला में प्रदूषण का स्तर काफी कम था। 27 अक्तूबर को पीएम 10 मानक स्तर 50.49 मापा गया। इसके बाद लगाता प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा। 28 अक्तूबर को यहां 111 पर पहुंच गया। 29 अक्तूबर को 119, 30 अक्तूबर 119, 31 अक्तूबर को 140, एक नवंबर को 198 व दो नवंबर को यह 296 तक पहुंच गया। जबकि पीएम 10 मानक 100 या इससे कम होना चाहिए। ऐसे में अब पराली जलाने के केस बढ़ने से इसमें और अधिक इजाफा होगा।
सुबह के समय बढ़ता है प्रदूषण का स्तर
सुबह के समय प्रदूषण का स्तर अधिक बढ़ता है। दरअसल हवा में मौजूद धूल व धुएं के कण अधिक नमी होने के कारण पर्यावरण में अटक जाते हैं। इसके चलते दृश्यता भी कम रहती है।
प्रदूषण से बच कर रहें
इस मौसम में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। इसके लिए लोगों को कम से कम बाहर निकलना चाहिए। विशेषकर अस्थमा के मरीजों को सावधानी रखने की जरूरत होती है। मास्क का प्रयोग करें। बार-बार ठंडे पानी से आंखों को साफ करते रहना चाहिए।
डॉ. राजेश भोला, एमएस, नागरिक अस्पताल जींद।
लोगों को किया जा रहा है जागरूक
प्रदूषण रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसका असर भी दिख रहा है। इस बार धान की पराली जलाने के केस पिछले साल के मुकाबले काफी कम हैं। प्रदूषण का स्तर निर्माण कार्यों के चलते अधिक हो रहा है। यहां प्रदूषण रोकने के लिए काम शुरू किया जाएगा, ताकि पर्यावरण सही रहे। विनय गिल, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड