अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जाजवान गांव में पेयजल मुहैया कराने के लिए लगभग तीन साल पहले एक करोड़ 34 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी गांव के लोगों के कंठ प्यासे हैं। इससे जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठ रहे हैं। अब गांव की दलित बस्ती के लोगों का कहना है कि उनके यहां पानी नहीं पहुंच रहा है। इसको लेकर उन्होंने शनिवार को गांव के जलघर पर प्रदर्शन किया।
तीन साल बाद फिर पाइप लाइन को लेकर गांव की दलित बस्ती में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। शनिवार को दलित बस्ती के दर्जन भर लोगों ने जल घर के सामने प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इन लोगों ने कहा कि उनकी बस्ती में पिछले 15 दिन से पानी नहीं पहुंच रहा। जिस कारण बस्ती में सैकड़ों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी बस्ती में दबाए गए पाइप इतने कमजोर हैं कि वह पानी की सप्लाई छोड़ते ही लीक हो जाते हैं जिस कारण बस्ती में पानी नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत विभाग को भी की है। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। दलित अधिकार मंच के सदस्य संदीप जाजवान ने कहा कि गांव की दलित बस्ती में दबाई गई पाइप लाइन कमजोर होने के कारण यह समस्या है। जनस्वास्थ्य विभाग इन कमजोर पाइपों को बदलवाने के लिए कोई काम नहीं कर रहा।
बहुचर्चित रहा है मामला
जाजवान गांव में पेयजल का मामला बहुचर्चित रहा है। दरअसल इस गांव में पेयजल के लिए दबाई गई पाइप लाइन में काफी गड़बड़झाला हुआ था। इसके बाद विधायकों की पब्लिक अकाऊंट्स कमेटी (पीएसी) ने भी मामले की जांच की। इसके बाद दोबारा पाइप लाइन डाली गई और गांव के जलघर में पानी पहुंचाया गया। अब गांव के दलितों का कहना है कि उनके यहां नई पाइप लाइन नहीं डाली गई। पहले वाली पाइप लाइन लीकेज है जिसके चलते उनके यहां पानी नहीं पहुंच रहा है।