एलबेंडाजोल की गोली खाते ही 27 बच्चों की बिगड़ी तबीयत, नागरिक अस्पताल में भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। बच्चों के पेट में कीड़े मारने के लिए शनिवार को जिला भर में कृमिरोधी दवा एलबेंडाजोल खिलाई गई। इससे जुलानी रोड स्थित एसपी मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 27 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। स्कूल में पहली कक्षा से 12वीं कक्षा के 546 बच्चों को दी गई, जिसके बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद स्कूल के स्टाफ सदस्यों ने सभी बच्चों को नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। वहीं स्कूल प्रशासन का कहना है, शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के साथ जबरदस्ती कर रहा है। डीईओ ऑफिस से फोन आया और कहा कि बच्चों को भेजी गई दवाई दे दी क्या, अगर दवा दे दी गई है, फोटो व्हाट्सएप करो। जैसे स्कूल स्टाफ के सदस्यों ने बच्चों को गोली देने के बाद फोटो विभाग को भेजी। उसी दौरान 27 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई।
स्कूल प्रशासन के अनुसार 546 बच्चों को दवाई दी गई थी, जिसमें 27 बच्चों की अचानक उल्टी व सिरदर्द होने लगा, बच्चों की तबीयत ज्यादा खराब होते देख स्कूल ने उन्हें नागरिक अस्पताल में भर्ती करवा दिया। हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से बच्चों की छुट्टी कर दी गई। अचानक इस प्रकार की सूचना मिलते ही अभिभावक अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।
इससे पहले भी हो चुकी है, ऐसी घटनाएं
दवा का सेवन करने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली आयरन की गोली से बच्चों की तबीयत बिगड़ी है।
बच्चों की हालात स्थिर
एलबेंडाजोल की गोलियां लेने के बाद बच्चों की बिगड़ी तबीयत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार जल्द ही बच्चों की हालात जल्द ठीक हो जाएगी। यहां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी कर दी गई।
जबरदस्ती कर रहा शिक्षा विभाग
पहली से 12वीं कक्षा तक के 546 बच्चों को गोलियां दी गई थी जिसमें 27 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। शिक्षा विभाग डीईओ ऑफिस से फोन आया था कि एलबेंडाजोल की गालियां बच्चों को दी जाए और इसकी फोटो भी व्हाट्एप की जाए। शिक्षा विभाग जबरदस्ती कर प्राइवेट स्कूलों को परेशान कर रहा है। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। इस पर सरकार को कुछ कड़े फैसला लेना चाहिए।
बीएस गर्ग, स्कूल डायरेक्टर।
आधा घंटे तक किया इंतजार
दोपहर के समय बच्चों को दवा खिलाते ही अधिकतर बच्चों की तबियत बिगड़ने लगी। स्कूल स्टाफ के अनुसार बच्चों को सिर में चक्कर और उल्टियां शुरू हो गईं। इस पर स्टाफ ने करीब आधा घंटे तक इंतजार किया। इस दौरान कुछ बच्चों की तबीयत सामान्य हो गई, लेकिन 27 बच्चों को आराम नहीं आया। इसके बाद इन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
दवा की हो जांच
सरकारी सप्लाई में आने वाली दवा की गुणवत्ता हमेशा ही शक के दायरे में रहती हैं। मैं घर पर भी बच्चों को एलबेंडाजोल की गोलियां खिलाता हूं। कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। मेरे दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। दोनों सुबह घर से खाना खाकर गए थे। दोपहर को भी लंच खाया था। इसके बाद भी दोनों की तबियत बिगड़ गई। इस सप्लाई की जांच होनी चाहिए।
हरपाल सिंह सांगवान, अभिभावक
निकल गई पैरों तले की जमीन
बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही पैरों तले की जमीन ही निकल गई। सरकार को इस प्रकार की दवाइयां जांच परख कर ही लेनी चाहिएं, ताकि बच्चों को किसी प्रकार की दिक्कत नजहीं हो।
धर्मबीर, अभिभावक
यह दवा बहुत ही सुरक्षित होती है। कई बार खाली पेट गोली लेने से बच्चों को दिक्कत हो जाती है। सूचना मिलते ही मैंने अधिकारियों को भेजा, लेकिन यहां कोई गंभीर बात नहीं थी। यह दवा बच्चों के लिए बहुत ही जरूरी होती है।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन।चे।