अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिला में स्वास्थ्य सेवाएं केवल 15 एंबुलेंस के भरोसे चल रही है। जिस प्रकार जिले में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, उस अनुपात में जिले में एंबुलेंस सेवाओं में इजाफा नहीं हो रहा है। अधिकतर एंबुलेंस जींद से रोहतक या अन्य अस्पतालों में रेफर किए जाने वाले मरीजों में ही व्यस्त रहती हैं। इस कारण इमरजेंसी सेवाओं के लिए बहुत बार एंबुलेंस सेवा नहीं मिल पाती। इस कारण प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जो मरीजों के परिजनों की जेब पर भारी पड़ता है।
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 1200 लोग इलाज के लिए आते हैं। प्रतिदिन 10 से 12 महिलाओं की डिलीवरी होती है। इसी प्रकार आठ से दस लोगों को प्रतिदिन जींद से अन्य अस्पतालों में रेफर किया जाता है। इस हिसाब से नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस की भारी कमी है। कई बार इमरजेंसी सेवाओं के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाती। ऐसे ही महिलाओं को डिलीवरी के बाद घर छोड़ने, डिलीवरी के लिए महिलाओं को नागरिक अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत आती है। मरीजों को नागरिक अस्पताल की एंबुलेंस के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। मरीजों के परिजन अक्सर नागरिक अस्पताल की एंबुलेंस का लंबा इंतजार करने के बाद प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेते हैं। इस कारण मरीजों के परिजनों को जेब से खर्च करना पड़ता है। इस समय जिले में चार नागरिक अस्पताल, सात सामुदायिक स्वास्थ्य, 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 163 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। इस लिहाज से पूरे जिले में एंबुलेंसों की यह संख्या बहुत ही कम है।
एक एंबुलेंस कंडम
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल 16 एंबुलेंस हैं। इनमें से एक को कंडम घोषित कर दिया है। इस प्रकार अब 15 एंबुलेंस ही पूरे जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध हैं। नागरिक अस्पताल में छह एंबुलेंस, नागरिक अस्पताल सफीदों में एक, नागरिक अस्पताल नरवाना में एक, नागरिक अस्पताल उचाना में एक, सीएचसी कालवा में एक, खरकरामजी में एक, जुलाना में एक, उझाना में एक, कंडेला में एक और धमतान साहिब सीएचसी में एक एंबुलेंस उपलब्ध है। पूरे जिले में केवल दो एएलएस (एडवांस लाइफ स्पोट सिस्टम) एंबुलेंस उपलब्ध हैं। दोनों ही नागरिक अस्पताल जींद में उपलब्ध हैं। इसके अलावा 13 बीएलएस (बेसिक लाइफ स्पोट सिस्टम) हैं। एएलएस में ईसीजी, सेक्शन मशीन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं जबकि बीएलएस में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। जिले में किलकारी नाम की एक एंबुलेंस भी है, जो जच्चा व बच्चा को छोड़ने के लिए जाती है।
यह है एंबुलेंस के कंडम होने के नियम
जो एंबुलेंस नौ से दस वर्ष की समयावधि या ढाई लाख किलोमीटर चल जाए उसको स्वास्थ्य विभाग कंडम घोषित कर देता है।
नहीं मिलती समय पर एंबुलेंस
जिले में एंबुलेंसों का भारी कमी है। एमरजेंसी के समय एंबुलेंस नहीं मिल पाती। एंबुलेंस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। किसी भी समय नागरिक अस्पताल में कोई एंबुलेंस खड़ी नहीं मिलती है। जब जरूरत होती है तो एंबुलेंस काफी इंतजार के बाद मिलती है। मजबूरीवश प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है।
कपूर सिंह, अहिरका
जच्चा-बच्चा के लिए नहीं मिलती एंबुलेंस
एंबुलेंस के लिए नागरिक अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है। किसी भी समय एंबुलेंस नहीं मिलती। जब जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने की बात आती है तो एंबुलेंस का इंतजार करने के बार निजी वाहनों में लेकर जाने पर मजबूर होना पड़ता है। इस प्रकार स्वास्थ्य सुविधाओं का कोई खास लाभ नहीं मिल पाता।
सतीश, रामराय गेट
डिमांड भेजी है
जनसंख्या के हिसाब से एंबुलेंस की डिमांड डीसी और स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई है। कम एंबुलेंस के बावजूद मैनेज करके काम चलाया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को एंबुलेंस की कोई कमी नहीं आने दी जाती। कई बार एंबुलेंस किसी मरीज को छोड़ने गई हो तो दूसरे मरीज को कुछ इंतजार करना पड़ जाता है लेकिन ऐसे मामले बहुत कम आते हैं।
डॉ. राजेश भोला,
डिप्टी सीएमओ रेफरल ट्रांसपोर्ट