जींद। खरैंटी गांव के 120 मनरेगा मजदूरों को 50 दिन से काम नहीं मिला है। वह कई बार अधिकारियों के चक्कर काटकर काम की मांग कर चुके हैं।
मनरेगा मजदूरों ने जुलाना एबीपीओ पर मस्ट्रॉल भी अपने पास रखने का आरोप लगाया है। आरोप है कि जुलाना एबीपीओ उन्हें जानबूझकर काम नहीं देना चाहती हैं। इसको लेकर ग्राम पंचायत खरैंटी ने भी जिला परिषद सीईओ डॉ. किरण सिंह को पत्र लिखकर मनरेगा मजूदरों को काम दिलाने का अनुरोध किया है। मई में किए गए कार्य की भी पूरी मजदूरी नहीं दी गई है। उन्हें 374 के बजाय 270 रुपये ही दिए गए हैं। मजदूरों ने एतराज जताया पर उनको पूरी मजदूरी नहीं दी गई। अब मजदूरों को नया काम भी नहीं मिला है और न ही पुरानी मजदूरी की पूरी राशि मिल पाई है। अब वे मुख्यमंत्री के समाधान शिविर में समस्या लेकर जाएंगे।
खरैंटी गांव के मनरेगा मजदूर सूरजभान, संतलाल, अनिल, प्रकाश, सुदेश, मनीष, पिरथी ने बताया कि उन्होंने 30 मई तक तालाब खुदाई का कार्य किया। इसके बाद 5 जून को जेई अश्वनी और बीएफटी सतीश खरैंटी गांव में पैमाइश के लिए आए। पैमाइश करने के बावजूद जेई और बीएफटी ने कहा कि उनकी मजदूरी पूरी आएगी। उन्होंने मजदूरों के पैमाइश पर हस्ताक्षर करवा लिए, लेकिन उसी दिन शाम को जेई अश्वनी का मंजीत मेट के पास फोन आया कि मजदूरी 274 रुपये के हिसाब से आएगी। जब मजदूरों ने जिला परिषद के सीईओ के पास शिकायत की तो उन्होंने जेई कृष्ण को दोबारा से पैमाइश के लिए भेजा। उस समय जेई कृष्ण ने पैमाइश करते हुए कहा था कि मजदूरों ने कार्य पूरा किया हुआ है, लेकिन उसके बावजूद भी मजदूरों को 274 रुपये के हिसाब से मजदूरी दी गई।
एबीपीओ कर रही मजदूरों को गुमराह
मनरेगा मजदूरों ने आरोप लगाया कि एबीपीओ उन्हें गुमराह कर रही हैं। उन्होंने मस्ट्रॉल अपने पास रखा हुआ है। जब वह मस्ट्रॉल लेने जाते हैं तो कहती है कि उनके पास नहीं है। जब तक मस्ट्रॉल उनके पास है उन्हें काम नहीं मिलेगा। वह पिछले 50 दिनों से घर खाली बैठे हैं। एबीपीओ ने उन्हें आश्वासन भी दिया था कि उन्हें मजदूरी के रूप में 370 रुपये दिए जाएंगे, लेकिन जानबूझकर उन्हें 274 रुपये के हिसाब से मजदूरी दी गई।
बीडीपीओ जुलाना ने गांव के मेट मंजीत का स्पष्टीकरण निकाला हुआ है। जब तक उसका जवाब नहीं मिलता, तब तक उसके मजदूरों को काम नहीं मिलेगा। -नेहा चोपड़ा, एबीपीओ, जुलाना।
21जेएनडी13-खरैंटी गांव के मनरेगा मजदूर, जिन्हें 50 दिनों से काम नहीं मिला है। संवाद