फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जुलाना क्षेत्र में जलभराव रोकने की परियोजना का निरीक्षण करने पहुंचे डीसी डॉ. आदित्य दहिया,

विज्ञापन
विज्ञापन
जुलाई में मंजूर हुई राशि, ड्रेन का शुरू नहीं हुआ काम, प्रगति रिपोर्ट देख उपायुक्त ने लगाई फटकार
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। बारिश के मौसम में जुलाना क्षेत्र में हर साल जलभराव होता है और किसानों की फसल का नुकसान होने के साथ घरों आदि को नुकसान होता है। इससे निजात दिलाने के लिए सरकार द्वारा परियोजना शुरू की गई है। जिसका मंगलवार को उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया निरीक्षण करने के लिए पोली गांव पहुंचे। मगर यहां पहुंचने पर पता चला कि काम कुछ हो ही नहीं रहा है। इससे नाराज उपायुक्त ने अधिकारियों को फटाकर लगाई। इस पर जब कर्मचारी डीसी डॉ. आदित्य दहिया के लिए पानी लेकर आए तो उन्होंने कहा कि मैं पानी पीने नहीं काम देखने आया हूं, काम दिखाओ। इतना ही नहीं ड्रेन पर चल रहे काम को लेकर जब डीसी ने पूछा तो एसडीओ अनिल कादियान ने कहा कि काम चल रहा है। ऐसे में डीसी ने एमबी (मेजरमेंट बुक) दिखाने के लिए कहा। एसडीओ ने कहा कि गाड़ी में है। डीसी ने गाड़ी से एमबी लाने के लिए कहा, लेकिन गाड़ी में होने का उनका बहाना काम नहीं आया। उन्होंने एमबी ही नहीं बनाई तो दिखाए कहां से।
जानकारी के लिए जुलाना क्षेत्र में बारिश के मौसम में जलभराव से करीब 20 हजार एकड़ फसल प्रभावित होती है। वहीं इस बार करीब 30 हजार एकड़ फसल बारिश में बर्बाद हो गई थी। करीब पांच हजार एकड़ में तो इस साल गेहूं की बिजाई ही नहीं हो पाई। इस पर सरकार ने पिछले साल समस्या के समाधान के लिए तीन करोड़ 45 लाख रुपये ड्रेन की डेप्थ बढ़ाने के साथ मोटरों की पानी निकालने की क्षमता बढ़ाने के लिए मंजूर किए थे। इसके तहत ही बारिश का पानी निकालने की व्यवस्था की जानी है। मंगलवार को उपायुक्त पोली गांव पहुंचे और कार्य की प्रगति जाननी चाही। उन्होंने जब प्रगति के बारे में पूछा तो अधिकारी एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए।
विज्ञापन

उपायुक्त ने कहा कि मई 2018 को ड्रेन का काम शुरू करना था, उसकी रिपोर्ट दिखाओ। अधिकारियों ने कहा कि केवल मिट्टी उठाने का काम ही हो पाया है, उसके बाद बरसात आ गई। इस पर अधिकारियों ने लीपापोती करनी शुरू कर दी, लेकिन डीसी ने कहा कि जो सवाल आपसे पूछा गया है, केवल उसी का जवाब दें। उन्होंने कहा कि जुलाई 2018 में ग्रांट मंजूर हो चुकी थी तो काम क्यों नहीं किया। काम किया तो बताओ कितना किया। अधिकारियों ने कहा कि तीन करोड़ 45 लाख की ग्रांट की मंजूरी मिली थी। इसमें से ड्रेन की सफाई की गई थी। जिस पर पांच लाख रुपये खर्च किए गए। इस पर सिंचाई विभाग के एसडीओ ने गोलमोल जवाब दिया, लेकिन डीसी ने कहा कि एमबी दिखाओ तो एसडीओ के पास कोई भी कागज नहीं मिला। डीसी ने एसडीओ को फटकार लगाते हुए कहा कि जब आपके सामने डीसी, एक्सईएन व एससी फाइल उठाए खड़े हैं तो आपके पास कोई भी कागज क्यों नहीं है। डीसी ने कहा कि आपको पहले ही निर्देश दिए गए थे कि पंप हाउस पर मुआयने के लिए जाना है तो आप पूरी तैयारी के साथ क्यों नहीं आए। डीसी ने कहा कि ड्रेन पर काम की क्या रिपोर्ट है तो अधिकारियों ने कहा कि आज ही काम शुरू कर दिया है।
ड्रेन और पंप हाउस की क्षमता 55 से बढ़ाकर 110 क्यूसिक होगी
परियोजना के तहत दो करोड़ 75 लाख रुपये से दो हजार फुट की ड्रेन को पक्का किया जाना है। सिंचाई विभाग के एसडीओ अनिल कादियान ने बताया कि सरकार के पास 10 हजार फुट की ड्रेन को पक्का करने का मसौदा भेजा गया था, लेकिन सरकार ने केवल दो हजार फुट को ही मंजूरी दी है। दो करोड़ 75 लाख रुपये से ड्रेन को पक्का किया जाएगा। इसमें चार पुल और चार वाटर क्रासिंग बनाई जाएगी। पंप हाउस और ड्रेन की क्षमता को 55 से बढ़ाकर 110 क्यूसिक किया जाएगा। ड्रेन की गहराई सात फीट और चौडाई 10.50 फुट की जाएगी। पंप हाउस पर छह पंप लगाए जाएंगे। पुराने और जर्जर हुई चार पंपों को बदला जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा, पोली गांव की अधूरी पड़ी ड्रेन को भी पूरा करवाओ
पोली पंप हाउस पर पहुंचे डीसी से पोली गांव के किसानों ने कहा कि पोली गांव में लाइनपार ड्रेन बनी हुई है। यह मात्र एक एकड़ की खुदाई होनी बाकी है। इसकी वजह से हर वर्ष सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो जाती है। अब भी 500 एकड़ में फसल की बिजाई नहीं हो पाई है। इस पर डीसी ने कहा कि उसका भी समाधान जल्द ही करवाया जाएगा।
विज्ञापन

10 माह के बाद आखिर काम हुआ शुरू
पोली की ड्रेन को साफ करने का काम 10 महीना बीतने के बाद आखिर शुरू हो गया। पिछले साल मई में ड्रेन को पक्का करने की मंजूरी मिली थी, लेकिन काम शुरू नहीं किया गया। अब डीसी के दौरे को देखते हुए 10 माह बाद शुरू किया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें