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जानकारी के अभाव में सरकारी नहीं निजी दुकानों पर पंजीकरण करवाने वाले किसान भी बेच रहे सरसों

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जानकारी के अभाव में पंजीकरण करवा चुके किसान निजी दुकानों पर बेच दी सरसों
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद / उचाना। किसान को फसल बेचने के लिए सरकार की मेरी फसल मेरा ब्योरा योजना रास नहीं आ रही है। इस योजना के तहत वीरवार को जींद और उचाना की मंडियों में सरसों की खरीद का कार्य सरकार द्वारा शुरू किया गया था। इन दोनों मंडियों में पहले दिन एक दाना भी किसान सरसों का लेकर नहीं आए। इसके विपरीत निजी दुकानों पर सरसों की खूब खरीदारी हुई। जिले में इस योजना के तहत 2130 किसानों ने सरसों का पंजीकरण करवाया है। इसका एक कारण तो किसानों को इस योजना की संपूर्ण जानकारी नहीं होना है।
सरकार ने खरीद कार्य को शुरू तो करवाया, लेकिन इसमें गांव स्तर पर जानकारी देने के लिए न तो मुनादी करवाई गई और न ही कृषि विभाग के अधिकारियों ने सरसों के किसानों को कोई जानकारी दी गई। ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि किस दिन उसके गांव की सरसों मंडी में खरीदी जाएगी। वीरवार को प्रथम दिन जींद की मंडी में भैरोखेड़ा, टोडी खेड़ी, साहनपुर व अकालगढ़ के किसानों की सरसों की खरीद होनी थी। इन चारों गांवों में से एक भी किसान सरसों भेजने के लिए मंडी में नहीं पहुंचा।
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खरीद की सभी तैयारियां पूर्ण
उचाना में हैफेड मैनेजर अशोक सिहाग ने बताया कि सरसों की फसल बेचने के लिए आने वाले किसान सरसों को सुखाकर लाए। सरसों में आठ प्रतिशत से ज्यादा नमी मिलने पर किसान की सरसों नहीं खरीदी जाएगी। सरकारी दुकान पर वही किसान सरसों लाएं जिन्होंने मेरी फसल मेरा ब्यौरा योजना के तहत फसल का पंजीकरण करवाया है। सरकारी दुकान पर सरसों खरीद की सभी तैयारियां पूरी हैं। मंडी में सरसों लाने वाले किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
योजना का नहीं कोई पता, किसानों को लूटने के लिए बनी योजना
मंडी में बड़ौदी गांव से दो एकड़ की सरसों बेचने आए बुजुर्ग ने कहा कि उनको इस योजना के बारे में किसी ने कोई जानकारी नहीं दी। अगर कोई कर्मचारी उनको इस योजना के बारे में बताता तो वह जरूर पंजीकरण करवाते और अपनी सरसों की फसल को सस्ते में बेचने के लिए मजबूर नहीं होते। इस योजना का किसानों को नुकसान के अतिरिक्त कोई लाभ नहीं है। मंडी में सीधे तौर पर किसान की फसल खरीदी जानी चाहिए।
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-हरदेव सिंह किसान।
सरसों का पंजीकरण करवाया है, लेकिन पता नहीं कब कोई खरीदे
मंडी में निजी दुकान पर बीबीपुर गांव से चार एकड़ की सरसों बेचने के लिए आए किसान ने कहा कि उन्होंने योजना के तहत फसल का पंजीकरण तो करवाया था, लेकिन अब क्या पता चलेगा की कब उनकी सरसों खरीदी जाएगी। अगर उस दिन का पता नहीं चला तो महीनों तक फिर घर में ही रखनी पड़ेगी। सरकार की इस योजना से किसान को प्रति एकड़ चार से पांच हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरसों की सरकारी खरीद सभी दुकानों पर आढ़तियों के माध्यम से होनी चाहिए।
-चांदी किसान
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