किसानों के लिए बनी स्कीमों में ही होता है स्कैम : पी साईनाथ
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा सोमवार को ‘वर्तमान दौर में कृषि संकट’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान जाने माने कृषि विशेषज्ञ पी साईनाथ मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। साईनाथ ने कहा कि किसानों के लिए बनने वाली स्कीम में ही स्कैम है। दरअसल इन योजनाओं का पैसा किसानों को जाने के बजाय कंपनियों को चला जाता है। किसान खाली हाथ रह जाते हैं। यही कारण है कि देश में किसान खेत मजदूर बनता जा रहा है और पैसा अमीरों के पास, जिसकी वजह से वे अरबपति बनते जा रहे हैं।
साईनाथ ने कहा कि आज के दौर में कृषि का संकट केवल किसानों का संकट नहीं, बल्कि पूरे समाज व मानवता का संकट बन चुका है। जिसका समाधान सबको मिलकर करना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में तीन लाख 10 हजार से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इतना ही नहीं करीब 150 लाख से ज्यादा किसान खेती छोड़कर खेत मजदूर बन गए हैं। इससे खेती पर आश्रित बढ़ई, लोहार, जुलाहा और विभिन्न प्रकार के कारीगर भी बेरोजगार हो रहे हैं। उन्होंने कह कि 1991 में देश में एक भी अरबपति नहीं था, लेकिन 2000 में इनकी संख्या आठ हो गई। 2012 में 53 और 2018 में 121 अरबपति हो गए हैं। इन 121 अरबपतियों के पास पूरे देश की जीडीपी का 22 प्रतिशत धन इकट्ठा हो गया है। यह सब नीतियों के कारण हुआ है। किसानों के लिए बनने वाली नीतियों का लाभ कृषि उद्योगों को चला जाता है। इसी क्रम में फसल बीमा योजना भी है। पिछले तीन साल में करीब 68 हजार करोड़ रुपये बीमा कंपनियों ने कमाए हैं। यदि यह राशि किसानों को राहत देने के लिए खर्च कर दी जाती तो कृषि के लिए काफी अच्छा होता। इस मौके पर हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य अध्यक्ष डॉ. रणबीर दहिया, कृषि वैज्ञानिक बलजीत भयान और प्रेमसिंह, सचिव सोहन दास, फूलसिंह श्योकंद, प्रमोद गौरी, सुरेश कुमार, रामकुमार बहबलपुरिया, सीटू नेता रमेश चंद्र, प्रगतिशील किसान सुनील रेढू, रणबीर मलिक मौजूद रहे।
किसानों के लिए दो दिन निकालें अन्य वर्ग
इस दौरान पी साईनाथ ने कहा कि मांगों को लेकर देशभर के किसान संगठन 29-30 नवंबर को दिल्ली में एकत्रित होंगे। इस दौरान अन्य वर्गों को भी उनके लिए दो दिन निकालने चाहिए, क्योंकि किसान 365 दिन अन्य वर्गों के लिए काम करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मुहिम चलाने की जरूरत है, जिसमें डॉक्टर किसान के लिए, युवा किसान के लिए, कर्मचारी किसान के लिए और देश किसान के लिए खड़ा हो।